Previous Year Question
जैव विविधता को अधिकतम संकट है :
प्राकृतिक निवास एवं वनस्पतियों के विनाश से
अनुपयुक्त कृषि क्रियाओं से
जलवायु परिवर्तन से
जल प्रदूषण से
Correct Answer: A
Detailed Solution
जैव विविधता (Biodiversity) किसी क्षेत्र में उपस्थित जीवों की आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity), प्रजातीय विविधता (Species Diversity) तथा पारिस्थितिक विविधता (Ecosystem Diversity) को दर्शाती है। जैव विविधता के लिए सबसे व्यापक खतरों में प्राकृतिक आवासों और वनस्पतियों का विनाश (Habitat and Vegetation Destruction) शामिल है। वनों की कटाई, नगरीकरण, खनन, सड़क निर्माण और कृषि भूमि के विस्तार से प्राकृतिक आवास नष्ट होते हैं। परिणामस्वरूप जीवों को भोजन, आश्रय, प्रजनन स्थल और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी आबादी घट सकती है और विलुप्ति (Extinction) का जोखिम बढ़ता है।
आवासीय विखंडन (Habitat Fragmentation) प्राकृतिक आवासों को छोटे-छोटे, अलग-अलग भागों में विभाजित कर देता है। उदाहरण के लिए, किसी विस्तृत वन क्षेत्र के बीच सड़क, बाँध या मानव बस्ती बनने से वन्यजीव आबादियों का संपर्क बाधित हो सकता है। इससे जीवों का आवागमन, प्रजनन और विभिन्न आबादियों के बीच जीन प्रवाह (Gene Flow) प्रभावित होता है। छोटी तथा पृथक आबादियों में आनुवंशिक विविधता घट सकती है और अंतःप्रजनन (Inbreeding) की संभावना बढ़ सकती है। विशेष रूप से बाघ, हाथी और अन्य बड़े क्षेत्र में विचरण करने वाले जीव आवासीय विखंडन से प्रभावित होते हैं।
अनुपयुक्त कृषि क्रियाएँ (Unsustainable Agricultural Practices) भी जैव विविधता को प्रभावित करती हैं। अत्यधिक कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग, एकल फसल प्रणाली (Monoculture) तथा भूमि का अत्यधिक दोहन मिट्टी के जीवों, परागणकर्ताओं (Pollinators) और अन्य प्रजातियों के लिए हानिकारक हो सकता है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) तापमान, वर्षा और प्राकृतिक आवासों की परिस्थितियों को बदलता है, जिससे प्रजातियों के वितरण तथा प्रजनन पर प्रभाव पड़ता है। इसी प्रकार जल प्रदूषण (Water Pollution) से जलीय जीवों की मृत्यु, सुपोषण (Eutrophication) और घुलित ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। ये सभी जैव विविधता के महत्वपूर्ण खतरे हैं।
IPBES की 2019 की वैश्विक आकलन रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1970 के बाद स्थलीय और मीठे जल के पारिस्थितिक तंत्रों में भूमि उपयोग परिवर्तन (Land-use Change) प्रकृति के ह्रास का सबसे प्रभावशाली प्रत्यक्ष कारक रहा है। वैश्विक स्तर पर प्रकृति में परिवर्तन के पाँच प्रमुख प्रत्यक्ष कारक हैं—भूमि एवं समुद्री उपयोग परिवर्तन, जीवों का प्रत्यक्ष दोहन, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और विदेशज आक्रामक प्रजातियाँ (Invasive Alien Species)। प्राकृतिक आवासों की रक्षा, क्षतिग्रस्त क्षेत्रों का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन (Ecological Restoration) तथा जैविक गलियारों (Wildlife Corridors) का संरक्षण जैव विविधता की दीर्घकालिक सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपाय हैं।