Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
सूची-I (दार्शनिक) | सूची-II (दर्शन) |
A. रामानुज | 1. शुद्धाद्वैत |
B. माधवाचार्य | 2. द्वैताद्वैत |
C. निम्बार्क | 3. द्वैत |
D. वल्लभाचार्य | 4. विशिष्टाद्वैत |
कूट:
A–4, B–3, C–2, D–1
A–3, B–1, C–4, D–2
A–1, B–2, C–3, D–4
A–2, B–4, C–1, D–3
Correct Answer: A
Detailed Solution
रामानुज का संबंध विशिष्टाद्वैत दर्शन से है। इसमें ब्रह्म की एकता स्वीकार की जाती है, लेकिन जीव और जगत को भी वास्तविक माना जाता है। जीव तथा जगत ब्रह्म पर निर्भर हैं और उससे विशिष्ट संबंध रखते हैं। इसलिए इसका अर्थ विशेषताओं से युक्त अद्वैत है।
मध्वाचार्य का संबंध द्वैत दर्शन से है। इसके अनुसार ईश्वर और जीव के बीच वास्तविक भेद है; जीव ईश्वर के समान या पूर्णतः अभिन्न नहीं है। ईश्वर स्वतंत्र है, जबकि जीव उस पर निर्भर है। इस दर्शन में भक्ति का महत्त्व है। प्रश्न में लिखे “माधवाचार्य” से यहाँ द्वैत दर्शन के प्रवर्तक मध्वाचार्य अभिप्रेत हैं।
निम्बार्क का संबंध द्वैताद्वैत दर्शन से है। इसे स्वाभाविक भेदाभेद भी कहा जाता है। इसके अनुसार जीव और जगत का ब्रह्म से भेद भी है तथा अभेद भी। उनकी अपनी विशेषताएँ होने के कारण भेद है, जबकि ब्रह्म पर निर्भरता और उससे संबंध के कारण अभेद है।
वल्लभाचार्य का संबंध शुद्धाद्वैत दर्शन से है। इसमें ब्रह्म को परम सत्य मानते हुए जगत को भी वास्तविक माना जाता है। जगत ब्रह्म की अभिव्यक्ति है; उसे केवल भ्रम नहीं माना जाता। शुद्धाद्वैत में जगत की वास्तविकता स्वीकार करना इस मत को समझने का प्रमुख आधार है।