JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

POLITY · 2024

Previous Year Question

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

सूची-I

सूची-II

A. सहकारी संघवाद

1. के. सी. व्हेयर

B. सौदेबाजी संघवाद

2. आइवर जेनिंग्स

C. अर्ध-संघवाद

3. मॉरिस-जोन्स

D. केंद्रीकरण की प्रवृत्ति वाला संघवाद

4. ग्रैनविल ऑस्टिन

कूट:

A.

A-2, B-4, C-3, D-1

B.

A-2, B-1, C-4, D-3

C.

A-4, B-3, C-1, D-2

D.

A-3, B-2, C-4, D-1

Correct Answer: C

Detailed Solution

A. सहकारी संघवाद — ग्रैनविल ऑस्टिन (4)

ग्रैनविल ऑस्टिन ने भारतीय संघीय व्यवस्था को सहकारी संघवाद के रूप में वर्णित किया।

इस अवधारणा के अनुसार केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन होने के साथ-साथ साझा उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सहयोग भी आवश्यक होता है।

भारतीय संविधान में केंद्र और राज्यों के लिए अलग-अलग विधायी और प्रशासनिक शक्तियों की व्यवस्था है, लेकिन अनेक राष्ट्रीय और विकास संबंधी विषयों पर दोनों स्तरों की सरकारों को मिलकर कार्य करना होता है।

B. सौदेबाजी संघवाद — मॉरिस-जोन्स (3)

मॉरिस-जोन्स ने भारतीय संघीय व्यवस्था के लिए सौदेबाजी संघवाद की अवधारणा का प्रयोग किया।

इसमें केंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों, शक्तियों और नीतिगत विषयों पर बातचीत तथा समायोजन की भूमिका पर बल दिया जाता है।

इस अवधारणा में संघीय व्यवस्था केवल संवैधानिक शक्तियों के औपचारिक विभाजन तक सीमित नहीं होती, बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों में राजनीतिक और प्रशासनिक बातचीत भी महत्त्वपूर्ण होती है।

C. अर्ध-संघवाद — के. सी. व्हेयर (1)

के. सी. व्हेयर ने भारतीय संविधान को अर्ध-संघीय व्यवस्था के रूप में वर्णित किया।

उनका यह वर्णन भारतीय संविधान की संघीय विशेषताओं और केंद्र को प्राप्त अपेक्षाकृत व्यापक शक्तियों से संबंधित था।

भारतीय संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन किया गया है। इसके साथ ही अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ संसद को प्राप्त हैं और संविधान में आपातकालीन परिस्थितियों के लिए विशेष केंद्रीय शक्तियों की व्यवस्था भी है।

D. केंद्रीकरण की प्रवृत्ति वाला संघवाद — आइवर जेनिंग्स (2)

आइवर जेनिंग्स ने भारतीय संघीय व्यवस्था को केंद्रीकरण की प्रबल प्रवृत्ति वाली संघीय व्यवस्था के रूप में वर्णित किया।

यह अवधारणा भारतीय संविधान में संघीय ढाँचे के साथ-साथ केंद्र को दी गई विशेष शक्तियों से संबंधित है।

उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 249 के अंतर्गत राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के विषयों पर संसद को कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो सकती है। राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 250 के अंतर्गत भी संसद राज्य सूची के विषयों पर कानून बना सकती है।

इस प्रकार भारतीय संविधान में राज्यों की संवैधानिक स्थिति के साथ कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्र की विधायी शक्तियों के विस्तार की व्यवस्था है।

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