JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

POLITY · 2024

Previous Year Question

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

सूची-I

सूची-II

A. भारत की संचित निधि

1. अनुच्छेद 266

B. वित्त आयोग

2. अनुच्छेद 360

C. वित्तीय आपातकाल

3. अनुच्छेद 280

D. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

4. अनुच्छेद 148

कूट:

A.

A-3, B-1, C-2, D-4

B.

A-4, B-1, C-3, D-2

C.

A-1, B-3, C-2, D-4

D.

A-1, B-2, C-3, D-4

Correct Answer: C

Detailed Solution

A. भारत की संचित निधि — अनुच्छेद 266 (1)

अनुच्छेद 266 में भारत और राज्यों की संचित निधियों तथा लोक लेखों का प्रावधान है।

भारत सरकार को प्राप्त राजस्व, सरकार द्वारा लिए गए ऋण तथा सरकार द्वारा दिए गए ऋणों की वापसी से प्राप्त धन, संवैधानिक अपवादों के अधीन, भारत की संचित निधि का भाग बनता है।

अनुच्छेद 266(3) का महत्वपूर्ण प्रावधान है कि भारत की संचित निधि से कोई धन संविधान में निर्धारित तरीके और कानून के अनुसार ही विनियोजित किया जा सकता है।

B. वित्त आयोग — अनुच्छेद 280 (3)

अनुच्छेद 280 के अनुसार राष्ट्रपति वित्त आयोग का गठन करते हैं।

संविधान के प्रारंभ से दो वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर, अथवा राष्ट्रपति आवश्यक समझें तो उससे पहले, वित्त आयोग का गठन किया जा सकता है।

वित्त आयोग में एक अध्यक्ष तथा चार अन्य सदस्य होते हैं। इसका प्रमुख संवैधानिक कार्य संघ और राज्यों के बीच विभाज्य करों की शुद्ध प्राप्तियों के वितरण तथा राज्यों को सहायता अनुदान के सिद्धांतों के संबंध में सिफारिश करना है।

C. वित्तीय आपातकाल — अनुच्छेद 360 (2)

अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से संबंधित है।

यदि राष्ट्रपति को यह समाधान हो कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे भारत अथवा उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा है, तो वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा की जा सकती है।

यह राष्ट्रीय आपातकाल वाले अनुच्छेद 352 और राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता वाले अनुच्छेद 356 से अलग है।

D. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक — अनुच्छेद 148 (4)

अनुच्छेद 148 भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक—CAG—के संवैधानिक पद से संबंधित है।

CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र से की जाती है। उसे पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।

CAG के पद की स्वतंत्रता के लिए संविधान यह भी निर्धारित करता है कि पद छोड़ने के बाद वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद के लिए पात्र नहीं होगा।

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