Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
सूची-I (आंदोलन) | सूची-II (वर्ष) | |
A. पबना | 1. | 1855–56 |
B. एका | 2. | 1873–85 |
C. संथाल | 3. | 1922 |
D. ताना भगत | 4. | 1914 |
कूट :
A-1, B-2, C-4, D-3
A-2, B-3, C-1, D-4
A-3, B-1, C-4, D-2
A-4, B-3, C-2, D-1
Correct Answer: B
Detailed Solution
सही सुमेलन है — पबना आंदोलन–1873–85, एका आंदोलन–1922, संथाल विद्रोह–1855–56 और ताना भगत आंदोलन–1914।
पबना किसान आंदोलन 1873 से 1885 की अवधि से संबंधित है। बंगाल के पबना क्षेत्र में किसानों और जमींदारों के बीच मुख्य विवाद किराए में वृद्धि, अवैध उपकर और किसानों के occupancy rights को कमजोर करने के प्रयासों से जुड़ा था। 1873 में किसानों ने Agrarian League बनाकर संगठित रूप से अपने अधिकारों की रक्षा का प्रयास किया।
पबना आंदोलन की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह थी कि किसानों ने बड़े पैमाने पर कानूनी और संगठित प्रतिरोध का सहारा लिया। उनका प्रमुख संघर्ष जमींदारी उत्पीड़न के विरुद्ध था और इस प्रकार के कृषक आंदोलनों की पृष्ठभूमि ने आगे चलकर Bengal Tenancy Act, 1885 जैसे भूमि-संबंधी सुधारों की आवश्यकता को अधिक स्पष्ट किया।
एका आंदोलन मुख्यतः 1921–22 में संयुक्त प्रांत के हरदोई, बहराइच, सीतापुर और आसपास के क्षेत्रों में उभरा। इसके प्रमुख नेता मदारी पासी थे। किसानों की शिकायतों में ऊँचा लगान, बेदखली, अवैध वसूली और जमींदारों द्वारा किया जाने वाला शोषण शामिल था। प्रश्न में इसे 1922 से सुमेलित किया गया है।
संथाल विद्रोह 1855–56 में हुआ। इसका नेतृत्व प्रमुख रूप से सिद्धू और कान्हू ने किया। यह विद्रोह जमींदारों, महाजनों और औपनिवेशिक व्यवस्था से उत्पन्न भूमि तथा आर्थिक शोषण के विरुद्ध एक व्यापक जनजातीय प्रतिरोध था।
संथाल विद्रोह इतना व्यापक था कि इसके बाद प्रशासन को संथाल क्षेत्रों की शासन-व्यवस्था में परिवर्तन करना पड़ा और Santhal Parganas को एक अलग प्रशासनिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया। इससे विद्रोह के व्यापक सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव का पता चलता है।
ताना भगत आंदोलन 1914 में छोटानागपुर के उराँव समुदाय के बीच प्रारंभ हुआ। इसके प्रारंभिक नेता जतरा उराँव अथवा जतरा भगत थे। प्रारंभ में इसमें धार्मिक-सामाजिक शुद्धि, पशुबलि और मद्यपान का त्याग तथा समुदाय के जीवन में सुधार जैसे विचार प्रमुख थे।
बाद में ताना भगत आंदोलन ने औपनिवेशिक करों और शोषण के विरुद्ध स्वर ग्रहण किया तथा 1920 के दशक में इसके अनुयायियों का गांधीवादी राष्ट्रवादी राजनीति और अहिंसक आंदोलन से भी संबंध विकसित हुआ।