Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
सूची-I | सूची-II |
A. सिंधु घाटी सभ्यता | 1. चारागाह |
B. उत्तर वैदिक समाज | 2. जमींदारी |
C. ऋग्वैदिक समाज | 3. कृषक |
D. मध्य काल | 4. नगरीय |
कूट:
A-4, B-2, C-3, D-1
A-2, B-1, C-4, D-3
A-3, B-4, C-1, D-2
A-4, B-3, C-1, D-2
Correct Answer: D
Detailed Solution
A. सिंधु घाटी सभ्यता — नगरीय (4): हड़प्पा अथवा सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में उसका विकसित नगरीय स्वरूप था। हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, धोलावीरा और लोथल जैसे केन्द्रों में नियोजित बस्तियाँ, सड़कों का विन्यास, जल निकासी, शिल्प उत्पादन और व्यापार के प्रमाण मिलते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि कृषि महत्वपूर्ण नहीं थी; बल्कि मजबूत कृषि आधार ने इन नगरीय केन्द्रों को सहारा दिया।
B. उत्तर वैदिक समाज — कृषक (3): उत्तर वैदिक काल में कृषि का महत्व बहुत बढ़ गया। गंगा-यमुना दोआब तथा मध्य गंगा घाटी में बस्तियों के विस्तार के साथ हल-आधारित खेती अधिक महत्वपूर्ण हुई। जौ के साथ चावल और अन्य फसलों का उल्लेख मिलता है। पशुपालन जारी रहा, लेकिन वह प्रारम्भिक वैदिक काल की तरह जीवन-निर्वाह का मुख्य आधार नहीं रहा; कृषि और पशुपालन पर आधारित मिश्रित अर्थव्यवस्था विकसित हुई।
C. ऋग्वैदिक समाज — चारागाह (1): ऋग्वैदिक समाज का आर्थिक जीवन मुख्यतः पशुपालन प्रधान था। गाय-बैल धन और प्रतिष्ठा के महत्वपूर्ण माप थे तथा पशुओं के लिए चारागाह का विशेष महत्व था। कृषि ज्ञात थी, लेकिन प्रारम्भिक ऋग्वैदिक काल में पशुपालन की तुलना में उसकी भूमिका सीमित थी।
D. मध्य काल — जमींदारी (2): प्रश्न के व्यापक वर्गीकरण में मध्यकाल को जमींदारी अथवा भू-स्वामी मध्यस्थों से जोड़ा गया है। विशेषकर प्रारम्भिक मध्यकाल में भूमि-अनुदानों, भूमिधारी मध्यस्थों और कृषकों पर अधिकार रखने वाले वर्गों के विकास पर इतिहासकारों ने विशेष चर्चा की है। बाद के मध्यकाल में भी जमींदार जैसे ग्रामीण अधिकार-सम्पन्न समूह राजस्व और भूमि व्यवस्था में महत्वपूर्ण रहे।
यहाँ ध्यान रखना चाहिए कि ये चारों शब्द प्रत्येक काल की एक प्रमुख सामान्य विशेषता बताते हैं; इनसे उस पूरे काल की जटिल अर्थव्यवस्था को केवल एक ही रूप में सीमित नहीं किया जा सकता।