Previous Year Question
डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए केंद्र सरकार 100% निधीयन प्रदान करती है।
इस योजना के अंतर्गत भूकर मानचित्रों का अंकीकरण किया जाता है।
अधिकार अभिलेखों को स्थानीय भाषा से भारत के संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी भाषा में लिप्यंतरित करने की पहल की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
1 और 2
2 और 3
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। इसका उद्देश्य देश में एक आधुनिक, पारदर्शी और एकीकृत भूमि-अभिलेख प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है।
कथन 1 सही है। DILRMP को 1 अप्रैल 2016 से Central Sector Scheme के रूप में लागू किया जा रहा है। इसलिए इसके कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
यह कार्यक्रम पहले National Land Records Modernisation Programme (NLRMP) के नाम से जाना जाता था। बाद में इसका नाम बदलकर DILRMP किया गया।
कथन 2 सही है। DILRMP के प्रमुख घटकों में शामिल हैं:
अधिकार अभिलेखों का Computerisation;
पुराने भूमि अभिलेखों का Digitisation;
Cadastral Maps अथवा भूकर मानचित्रों का Digitisation;
मानचित्रों और लिखित भूमि अभिलेखों का एकीकरण;
पंजीकरण प्रक्रिया का Computerisation;
भूमि-अभिलेख और पंजीकरण प्रणाली का एकीकरण;
Survey और Re-survey;
Unique Land Parcel Identification Number का निर्माण।
Cadastral Map किसी क्षेत्र की भूमि-खण्ड सीमाएँ, भू-खण्ड संख्या और स्वामित्व-संबंधी स्थानिक जानकारी प्रदर्शित करता है।
कथन 3 सही है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अधिकार अभिलेख सामान्यतः स्थानीय भाषाओं में रखे जाते हैं। इससे दूसरे भाषायी क्षेत्र के नागरिकों, बैंकों, न्यायालयों और निवेशकों को भूमि-अभिलेख समझने में कठिनाई हो सकती है।
इस भाषायी बाधा को दूर करने के लिए भूमि संसाधन विभाग ने C-DAC, पुणे के तकनीकी सहयोग से अधिकार अभिलेखों को स्थानीय भाषा से संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित 22 भाषाओं में से किसी भी भाषा में लिप्यंतरित करने की पहल की है।
यहाँ Transliteration का अर्थ अनुवाद नहीं, बल्कि एक लिपि में लिखे शब्दों को दूसरी लिपि में प्रस्तुत करना है, ताकि भूमि-अभिलेख की मूल प्रविष्टि का स्वरूप और अर्थ सुरक्षित रहे।