JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2017

Previous Year Question

शैवाल आधारित जैव ईंधनों का उत्पादन संभव है, लेकिन इस उद्योग की प्रोन्नति में विकासशील देशों की क्या संभावित सीमा/सीमाएँ है/हैं?

  1. शैवाल आधारित जैव ईंधनों का उत्पादन केवल समुद्रों में ही संभव है, महाद्वीपों पर नहीं।

  2. शैवाल आधारित जैव ईंधन उत्पादन को स्थापित करने और इंजीनियरी करने हेतु, निर्माण पूरा होने तक, उच्च स्तरीय विशेषज्ञता/प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है।

  3. आर्थिक रूप से व्यवहार्य उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर सुविधाओं की स्थापना आवश्यक होती है, जिससे पारिस्थितिक एवं सामाजिक चिंताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A.

1 और 2

B.

2 और 3

C.

केवल 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: B

Detailed Solution

  • शैवाल से बायोडीजल, बायोगैस, बायोएथेनॉल और अन्य प्रकार के जैव ईंधन उत्पादित किए जा सकते हैं।

  • जैव ईंधन उत्पादन के लिए मुख्यतः उच्च लिपिड सामग्री वाले सूक्ष्म शैवालों का उपयोग किया जाता है।

  • शैवालों की खेती केवल समुद्रों में ही नहीं, बल्कि भूमि पर खुले तालाबों और फोटोबायोरिएक्टरों में भी की जा सकती है।

  • इसके लिए अनुपजाऊ भूमि, लवणीय जल और कुछ परिस्थितियों में उपचारित अपशिष्ट जल का भी उपयोग किया जा सकता है।

  • इसलिए कथन 1 गलत है।

  • शैवाल आधारित जैव ईंधन उत्पादन में उपयुक्त शैवाल प्रजाति का चयन, संवर्धन, पोषक तत्त्वों की आपूर्ति और संदूषण-नियंत्रण सम्मिलित हैं।

  • इसके अतिरिक्त प्रकाश, तापमान, कार्बन डाइऑक्साइड और जल की परिस्थितियों को नियंत्रित करना पड़ता है।

  • शैवाल जैवभार की कटाई, जल-निष्कासन, सुखाने, तेल निष्कर्षण और ईंधन में परिवर्तन तकनीकी रूप से जटिल प्रक्रियाएँ हैं।

  • इन प्रक्रियाओं के संयंत्र की स्थापना और इंजीनियरी के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता आवश्यक होती है।

  • विकासशील देशों में आवश्यक प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षित मानव संसाधन और पूँजी की सीमित उपलब्धता बाधा बन सकती है।

  • इसलिए कथन 2 सही है।

  • आर्थिक रूप से व्यवहार्य उत्पादन के लिए शैवालों की खेती और प्रसंस्करण की सुविधाएँ बड़े पैमाने पर स्थापित करनी पड़ सकती हैं।

  • ऐसी सुविधाओं के लिए भूमि, जल, ऊर्जा, पोषक तत्त्वों और बड़ी पूँजी की आवश्यकता हो सकती है।

  • इनके कारण जल के उपयोग, भूमि के आवंटन, पोषक तत्त्वों के अपवाह और स्थानीय समुदायों पर प्रभाव से संबंधित पारिस्थितिक एवं सामाजिक चिंताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

  • इसलिए कथन 3 सही है।

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