JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

GEOGRAPHY · 2014

Previous Year Question

‘एकीकृत जलसंभर विकास कार्यक्रम’ को कार्यान्वित करने के क्या लाभ हैं?

  1. मृदा के बह जाने की रोकथाम।

  2. देश की बारहमासी नदियों को मौसमी नदियों से जोड़ना।

  3. वर्षा-जल संग्रहण तथा भौम-जल स्तर का पुनर्भरण।

  4. प्राकृतिक वनस्पतियों का पुनर्जनन।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

A.

1 और 2

B.

2, 3 और 4

C.

1, 3 और 4

D.

ये सभी

Correct Answer: C

Detailed Solution

कथन 1, 3 और 4 जलसंभर विकास के वास्तविक लाभ हैं। बारहमासी तथा मौसमी नदियों को जोड़ना जलसंभर विकास कार्यक्रम का उद्देश्य नहीं है।

जलसंभर क्या है?

  • जलसंभर वह भौगोलिक क्षेत्र है जहाँ गिरने वाला समस्त वर्षा-जल एक सामान्य निकास—जैसे नदी, नाला, तालाब या जलाशय—की ओर बहता है।

  • इसकी सीमा आसपास की ऊँची भूमि अथवा जल-विभाजक रेखा से निर्धारित होती है।

  • जलसंभर विकास में भूमि, जल, वनस्पति और मानव गतिविधियों का एकीकृत प्रबंधन किया जाता है।

  • इसका प्रमुख उद्देश्य वर्षा-जल को उसी क्षेत्र में रोकना, मिट्टी की नमी बढ़ाना और भूमि की उत्पादकता सुधारना है।

कथन 1: सही

जलसंभर विकास मृदा के बहाव और मृदा अपरदन को रोकता है।

इसके लिए निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं:

  • समोच्च रेखाओं के समानांतर मेड़बंदी।

  • कंटूर ट्रेंच और सीढ़ीनुमा खेतों का निर्माण।

  • छोटे नालों पर चेक डैम और गली प्लग बनाना।

  • खेत-तालाब और परकोलेशन टैंक बनाना।

  • ढालों पर घास, झाड़ियों और वृक्षों का रोपण।

  • कृषि भूमि पर वनस्पतिक अवरोध विकसित करना।

इन संरचनाओं से:

  • सतही अपवाह की गति कम होती है।

  • उपजाऊ ऊपरी मिट्टी बहने से बचती है।

  • गली और अवनालिका अपरदन घटता है।

  • नदियों तथा जलाशयों में गाद का जमाव कम होता है।

  • मिट्टी में जल के रिसाव के लिए अधिक समय मिलता है।

अतः कथन 1 सही है।

कथन 2: गलत

बारहमासी नदियों को मौसमी नदियों से जोड़ना जलसंभर विकास कार्यक्रम का भाग नहीं है।

  • नदी-जोड़ परियोजनाएँ बड़े स्तर की अंतर-बेसिन जल-अंतरण परियोजनाएँ होती हैं।

  • इनमें बाँध, बैराज, बड़ी नहरें और पंपिंग संरचनाएँ शामिल हो सकती हैं।

  • जलसंभर विकास छोटे अथवा सूक्ष्म जलग्रहण क्षेत्र में स्थानीय वर्षा-जल, मिट्टी और वनस्पति के प्रबंधन पर केंद्रित होता है।

  • इसलिए नदी-जोड़ और जलसंभर विकास अलग-अलग अवधारणाएँ हैं।

अतः कथन 2 गलत है।

कथन 3: सही

वर्षा-जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जलसंभर विकास के प्रमुख लाभ हैं।

  • चेक डैम, परकोलेशन टैंक, खेत-तालाब और समोच्च खाइयाँ वर्षा-जल को रोकती हैं।

  • रुका हुआ जल धीरे-धीरे भूमि में रिसता है।

  • इससे उथले जलभृतों का पुनर्भरण होता है।

  • कुओं और नलकूपों का जलस्तर सुधर सकता है।

  • मिट्टी में नमी अधिक समय तक बनी रहती है।

  • रबी फसलों और बहुफसली कृषि के अवसर बढ़ते हैं।

  • सूखे की अवधि में पेयजल और पशुओं के लिए जल उपलब्धता बेहतर होती है।

अतः कथन 3 सही है।

कथन 4: सही

जलसंभर विकास प्राकृतिक वनस्पति के पुनर्जनन में सहायता करता है।

  • वनीकरण और सहायक प्राकृतिक पुनर्जनन द्वारा क्षतिग्रस्त ढालों पर वनस्पति आवरण बढ़ाया जाता है।

  • चराई नियंत्रण तथा सामुदायिक चरागाह विकास से घास और झाड़ियों का पुनर्विकास होता है।

  • वनस्पति की जड़ें मिट्टी को बाँधकर अपरदन कम करती हैं।

  • वनस्पति आवरण वर्षा-बूंदों के सीधे प्रहार को रोकता है।

  • जैवविविधता, चारा, ईंधन और लघु वन उपज की उपलब्धता बढ़ सकती है।

  • बढ़ा हुआ वनस्पति आवरण स्थानीय सूक्ष्म जलवायु तथा भूमि की जैविक गुणवत्ता में सुधार करता है।

अतः कथन 4 सही है।

अन्य महत्त्वपूर्ण लाभ

  • वर्षा-आधारित कृषि की उत्पादकता में वृद्धि।

  • सूखा-सहनशीलता और जल-सुरक्षा में सुधार।

  • फसल विविधीकरण तथा दूसरी और तीसरी फसल की संभावना।

  • पशुपालन, बागवानी और कृषि-वानिकी का विकास।

  • बाढ़ के तीव्र प्रवाह और जलभराव में कमी।

  • ग्रामीण रोजगार एवं स्थानीय आजीविका के अवसर।

  • सामुदायिक भागीदारी से प्राकृतिक संसाधनों का दीर्घकालीन प्रबंधन।

कार्यक्रम का विकास

  • विभिन्न सूखा-प्रवण, मरुस्थलीय और बंजर भूमि विकास कार्यक्रमों को मिलाकर Integrated Watershed Management Programme विकसित किया गया।

  • बाद में इसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के Watershed Development Component में सम्मिलित किया गया।

  • वर्तमान दृष्टिकोण केवल जल-संरक्षण तक सीमित नहीं है; इसमें भूमि उपचार, आजीविका, सामुदायिक संस्थाएँ और जलवायु-सहनशील कृषि भी शामिल हैं।

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