Previous Year Question
भारत के सांस्कृतिक इतिहास के सन्दर्भ में, नृत्य एवं नाट्य-कला की एक मुद्रा जिसे ‘त्रिभंग’ कहा जाता है, प्राचीन काल से आज तक भारतीय कलाकारों को अतिप्रिय रही है। निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन इस मुद्रा को सर्वोत्तम रूप से वर्णित करता है?
Correct Answer: A
Detailed Solution
त्रिभंग शब्द ‘त्रि’ अर्थात तीन और ‘भंग’ अर्थात मोड़ अथवा झुकाव से बना है। यह भारतीय नृत्य और मूर्तिकला की एक विशिष्ट खड़ी मुद्रा है।
इस मुद्रा की प्रमुख विशेषताएँ हैं:
शरीर में मुख्यतः ग्रीवा, कटि और घुटने के स्तर पर तीन मोड़ बनते हैं।
शरीर का भार सामान्यतः एक पैर पर रहता है, जबकि दूसरा पैर मुड़ा हुआ अथवा ढीला रखा जाता है।
सिर और निचले अंग एक दिशा में झुकते हैं, जबकि धड़ विपरीत दिशा में झुकता है।
इन विपरीत वक्रों के कारण शरीर की आकृति सौम्य ‘S’ आकार जैसी दिखाई देती है।
यह स्थिर आकृति में भी लय, गति, तरलता और सौन्दर्य का आभास उत्पन्न करती है।
त्रिभंग का प्रयोग:
यह ओडिसी नृत्य की सर्वाधिक पहचानी जाने वाली मूल मुद्राओं में से एक है।
भारतीय मूर्तिकला में देवी-देवताओं, यक्षियों, शालभंजिकाओं और नायिकाओं को इस मुद्रा में प्रदर्शित किया गया है।
बाँसुरी बजाते कृष्ण का चित्रण भी प्रायः त्रिभंग मुद्रा में किया जाता है।
भरहुत, साँची, अजंता, खजुराहो और होयसला मंदिरों की कला में इसके विभिन्न रूप देखे जा सकते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
विकल्प (b) मुखाभिनय, हस्तमुद्राओं और वेशभूषा द्वारा किसी पात्र को प्रस्तुत करने की व्यापक नाट्य-प्रक्रिया बताता है; यह किसी विशिष्ट शारीरिक मुद्रा की परिभाषा नहीं है।
विकल्प (c) नृत्य और अभिनय में अभिव्यक्ति तथा कथावाचन की सामान्य प्रक्रिया बताता है।
विकल्प (d) प्रेम और शृंगार की अनुभूति व्यक्त करने वाले भावों का वर्णन करता है, पर त्रिभंग की संरचनात्मक विशेषता नहीं बताता।