Previous Year Question
निम्नलिखित में से किस घटना के बाद, गांधीजी, जिन्होंने अस्पृश्यता का लगातार विरोध किया और सभी क्षेत्रों से इसके उन्मूलन का आह्वान किया, ने अपने राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम में ‘हरिजनों’ के उत्थान को शामिल करने का निर्णय लिया?
Correct Answer: A
Detailed Solution
विकल्प (a) सही है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्ज़े मैकडोनाल्ड ने 16 अगस्त, 1932 को सांप्रदायिक निर्णय की घोषणा की। इसमें दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल का प्रावधान था। गांधीजी ने इसका विरोध करते हुए 20 सितंबर, 1932 को यरवदा जेल में आमरण अनशन प्रारंभ किया।
इसके बाद दलित वर्गों और सवर्ण हिंदुओं के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई और 24 सितंबर, 1932 को पूना समझौता हुआ।
यह स्पष्ट रखना आवश्यक है कि:
गांधीजी स्वयं पूना समझौते के हस्ताक्षरकर्ता नहीं थे।
डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व किया।
पंडित मदन मोहन मालवीय ने सवर्ण हिंदुओं की ओर से प्रमुख भूमिका निभाई।
समझौते में पृथक निर्वाचक मंडल के स्थान पर संयुक्त निर्वाचक मंडल में दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था स्वीकार की गई।
पूना समझौते के बाद गांधीजी ने अस्पृश्यता-उन्मूलन और दलित वर्गों के उत्थान को अधिक संगठित रूप से अपने सामाजिक-राजनीतिक कार्यक्रम का भाग बनाया। इसके प्रमुख परिणाम थे:
30 सितंबर, 1932: अखिल भारतीय अस्पृश्यता-विरोधी लीग की स्थापना हुई, जिसे बाद में हरिजन सेवक संघ कहा गया।
फरवरी 1933: गांधीजी के साप्ताहिक पत्र ‘Harijan’ का प्रकाशन प्रारंभ हुआ।
इसके बाद मंदिर-प्रवेश, सार्वजनिक सुविधाओं तक समान पहुँच, शिक्षा और अस्पृश्यता-उन्मूलन के लिए व्यापक अभियान चलाया गया।
अन्य विकल्पों की स्पष्टता:
(b) गांधी-इरविन समझौता, 1931: इसका संबंध सविनय अवज्ञा आंदोलन के स्थगन, राजनीतिक बंदियों और गोलमेज सम्मेलन से था।
(c) कांग्रेस नेतृत्व की गिरफ्तारी, 1942: इसका संबंध भारत छोड़ो आंदोलन के दमन से था।
(d) भारत सरकार अधिनियम, 1935: यह संवैधानिक सुधार और प्रांतीय स्वायत्तता से संबंधित था।