JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2025

Previous Year Question

तटरेखा आवास और मूर्त आय के लिए मैंग्रोव पहल (मिष्टी) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. इसे 2019 में प्रारम्भ किया गया था।

  2. इसका उद्देश्य मैंग्रोव वनों को पुनर्स्थापित करना है।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :

A.

केवल 2

B.

न तो 1 न ही 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

केवल 1

Correct Answer: A

Detailed Solution

कथन 1 गलत है। मिष्टी (MISHTI—Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes) योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2023–24 में की गई थी तथा इसे 5 जून, 2023 को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा प्रारम्भ किया गया। इसका उद्देश्य भारत के तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव वनों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और विस्तार को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम वर्ष 2019 में प्रारम्भ नहीं हुआ था। वर्ष 2019 में लागू तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना (Coastal Regulation Zone Notification—CRZ) मैंग्रोव संरक्षण से संबंधित एक अलग नियामक व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत मैंग्रोव क्षेत्रों को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Areas) के रूप में संरक्षण प्रदान किया गया है।

कथन 2 सही है। मिष्टी योजना का प्रमुख उद्देश्य मैंग्रोव वनों का पुनर्स्थापन (Mangrove Restoration), पुनर्वनीकरण (Reforestation) और वनीकरण (Afforestation) करना है। इस पहल के अंतर्गत भारत के तटीय क्षेत्रों और उपयुक्त लवणीय भूमि (Salt Pan Lands) में मैंग्रोव वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जाता है। सरकारी योजना के अनुसार, लगभग 540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मैंग्रोव पुनर्स्थापन और वनीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। यह कार्यक्रम वित्तीय वर्ष 2023–24 से पाँच वर्षों की अवधि के लिए तैयार किया गया था। पर्यावरण मंत्रालय के फरवरी 2025 के विवरण के अनुसार, भारत के 9 तटीय राज्यों और 4 केन्द्र शासित प्रदेशों में मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र पाए जाते हैं, जिनके संरक्षण और विस्तार को इस पहल से समर्थन मिलता है।

मैंग्रोव वन (Mangrove Forests) उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय तटीय क्षेत्रों के ज्वारीय क्षेत्र (Intertidal Zones) में विकसित होने वाली लवण-सहिष्णु वनस्पतियों (Salt-Tolerant Vegetation) के समुदाय हैं। इनमें Rhizophora, Avicennia और Sonneratia जैसे प्रमुख वंश पाए जाते हैं। मैंग्रोव की जटिल जड़ प्रणालियाँ (Root Systems) तटीय अवसादों को स्थिर करने, तटीय अपरदन (Coastal Erosion) कम करने और चक्रवातों तथा समुद्री तूफानों से होने वाले प्रभावों को सीमित करने में सहायता करती हैं। ये मछलियों, केकड़ों और अन्य समुद्री जीवों के लिए महत्वपूर्ण प्रजनन एवं संवर्धन स्थल (Breeding and Nursery Grounds) भी प्रदान करते हैं। मैंग्रोव तटीय नीले कार्बन (Blue Carbon) के महत्वपूर्ण भंडार हैं, क्योंकि ये जैवभार और जलसंतृप्त मिट्टी में बड़ी मात्रा में कार्बन संचित कर सकते हैं।

मिष्टी योजना का कार्यान्वयन (Implementation of MISHTI) केन्द्र और तटीय राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के समन्वय से किया जाता है। इसके लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS), प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) और अन्य सरकारी कार्यक्रमों के संसाधनों का अभिसरण (Convergence) किया जाता है। मैंग्रोव पुनर्स्थापन से तटीय जैव विविधता (Coastal Biodiversity) का संरक्षण, कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration), स्थानीय मत्स्य संसाधनों का संवर्धन और तटीय समुदायों की आजीविका में सुधार संभव है। इस प्रकार मिष्टी पहल पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के साथ जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (Climate Change Adaptation) और तटीय समुदायों की आर्थिक सुरक्षा को भी समर्थन देती है।

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