JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2025

Previous Year Question

नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।

अभिकथन (A): सतत विकास पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना होना चाहिये और वर्तमान के विकास को भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों के साथ समझौता नहीं करना चाहिये।

कारण (R): एजेंडा 21 पर विश्व नेताओं द्वारा 1995 में हस्ताक्षर किए गए थे।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A.

(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है

B.

(A) असत्य है, किन्तु (R) सत्य है

C.

(A) सत्य है, किन्तु (R) असत्य है

D.

(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है

Correct Answer: C

Detailed Solution

अभिकथन (A) सत्य है। सतत विकास (Sustainable Development) का उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को इस प्रकार पूरा करना है कि भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताएँ पूरी करने की क्षमता प्रभावित न हो। इस अवधारणा को वर्ष 1987 में विश्व पर्यावरण एवं विकास आयोग (World Commission on Environment and Development—WCED), जिसे ब्रुंटलैंड आयोग (Brundtland Commission) भी कहा जाता है, की रिपोर्ट Our Common Future में प्रमुखता से परिभाषित किया गया था। सतत विकास के तीन प्रमुख आयाम हैं—आर्थिक विकास (Economic Development), सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) और पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection)। इसका उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय क्षरण को सीमित करना तथा प्राकृतिक संसाधनों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करना है।

कारण (R) असत्य है। एजेंडा 21 (Agenda 21) को वर्ष 1995 में नहीं, बल्कि 3–14 जून, 1992 को ब्राजील के रियो डी जेनेरियो (Rio de Janeiro) में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण एवं विकास सम्मेलन (United Nations Conference on Environment and Development—UNCED) में अपनाया गया था। इस सम्मेलन को पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Earth Summit) या रियो सम्मेलन (Rio Summit) भी कहा जाता है। एजेंडा 21 को 14 जून, 1992 को 178 से अधिक देशों की सरकारों द्वारा अपनाया गया था। यह 21वीं सदी में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई एक व्यापक, गैर-बाध्यकारी कार्ययोजना (Non-Binding Action Plan) है। यह हस्ताक्षरित अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं थी, बल्कि वैश्विक, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन के लिए स्वीकृत कार्यक्रम था।

एजेंडा 21 के प्रमुख उद्देश्य गरीबी उन्मूलन (Poverty Eradication), उपभोग के असतत प्रतिरूपों में परिवर्तन (Changing Unsustainable Consumption Patterns), प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) और पर्यावरणीय प्रबंधन को मजबूत करना हैं। इसकी कार्ययोजना चार प्रमुख भागों में विभाजित है—सामाजिक एवं आर्थिक आयाम (Social and Economic Dimensions), विकास के लिए संसाधनों का संरक्षण एवं प्रबंधन (Conservation and Management of Resources for Development), प्रमुख समूहों की भूमिका को सुदृढ़ करना (Strengthening the Role of Major Groups) तथा कार्यान्वयन के साधन (Means of Implementation)। इसमें सरकारों, स्थानीय संस्थाओं, महिलाओं, युवाओं, वैज्ञानिक समुदाय और अन्य सामाजिक समूहों की भागीदारी पर बल दिया गया है।

सतत विकास की अंतरराष्ट्रीय पहलें समय के साथ विकसित हुई हैं। वर्ष 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन (Stockholm Conference) ने वैश्विक पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार किया। वर्ष 1987 की ब्रुंटलैंड रिपोर्ट ने सतत विकास की व्यापक अवधारणा प्रस्तुत की, जबकि 1992 के रियो सम्मेलन में एजेंडा 21 को अपनाया गया। वर्ष 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रियो+5 (Rio+5) के अंतर्गत एजेंडा 21 की प्रगति की समीक्षा की और वर्ष 2002 के जोहान्सबर्ग विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (World Summit on Sustainable Development) में इसके कार्यान्वयन की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इसके बाद वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र ने 2030 एजेंडा (2030 Agenda) के अंतर्गत 17 सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals—SDGs) को अपनाया।

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