Previous Year Question
‘पर्यावरण की वहन क्षमता’ के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
संसाधन निष्कर्षण की दर, संसाधन सृजन की दर से अधिक रहनी चाहिए।
अपशिष्ट का उत्पादन, पर्यावरण की अवशोषण क्षमता के भीतर रहना चाहिए।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
केवल 2
न तो 1 न ही 2
1 और 2 दोनों
केवल 1
Correct Answer: A
Detailed Solution
पर्यावरण की वहन क्षमता (Environmental Carrying Capacity) वह सीमा है, जिसके भीतर पर्यावरण अपने प्राकृतिक संसाधनों की आपूर्ति, अपशिष्टों के अवशोषण और जीवन के संरक्षण जैसे कार्यों को बिना दीर्घकालिक क्षति के बनाए रख सकता है। पर्यावरण के चार प्रमुख कार्य हैं—संसाधनों की आपूर्ति (Resource Supply), अपशिष्टों का समावेशन (Waste Assimilation), जैव विविधता के माध्यम से जीवन का पोषण (Life Sustenance) और सौंदर्यपरक सेवाएँ (Aesthetic Services) प्रदान करना। पर्यावरण की वहन क्षमता बनाए रखने के लिए संसाधनों का उपयोग उनकी पुनर्जनन क्षमता तथा अपशिष्टों का उत्पादन उनकी अवशोषण क्षमता के अनुरूप होना आवश्यक है।
कथन 1 गलत है। नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधनों (Renewable Natural Resources) के सतत उपयोग के लिए संसाधन निष्कर्षण की दर (Resource Extraction Rate), उनके पुनर्जनन की दर (Regeneration Rate) से अधिक नहीं होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि किसी वन से प्रतिवर्ष उतने वृक्ष काटे जाएँ, जितने प्राकृतिक या नियोजित पुनर्वनीकरण से पुनः विकसित हो सकते हैं, तो वन संसाधनों का दीर्घकालिक संरक्षण संभव हो सकता है। इसके विपरीत, निष्कर्षण की दर पुनर्जनन से अधिक होने पर संसाधनों का भंडार घटने लगता है और पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। कोयला और पेट्रोलियम जैसे अनवीकरणीय संसाधन (Non-Renewable Resources) मानव जीवनकाल के संदर्भ में पुनर्जनित नहीं होते, इसलिए उनके सीमित उपयोग, दक्षता और नवीकरणीय विकल्पों के विकास पर बल दिया जाता है।
कथन 2 सही है। पर्यावरण की अवशोषण क्षमता (Assimilative or Absorptive Capacity) से आशय अपशिष्टों और प्रदूषकों को आत्मसात करने, विघटित करने अथवा उनके प्रभाव को सहन करने की प्राकृतिक क्षमता से है। औद्योगिक अपशिष्ट (Industrial Waste), घरेलू मलजल (Domestic Sewage) तथा अन्य प्रदूषक जब पर्यावरण की अवशोषण क्षमता से अधिक मात्रा में उत्पन्न होते हैं, तो वायु, जल और मृदा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उदाहरण के लिए, किसी नदी में उसकी प्राकृतिक स्वशुद्धिकरण क्षमता (Self-Purification Capacity) से अधिक कार्बनिक अपशिष्ट पहुँचने पर घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) कम हो सकती है, जिससे जलीय जीव प्रभावित होते हैं। इसलिए अपशिष्ट उत्पादन का पर्यावरण की अवशोषण क्षमता के भीतर रहना आवश्यक है।
सतत विकास (Sustainable Development) का संबंध पर्यावरण की वहन क्षमता और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से है। पर्यावरणीय अर्थशास्त्री हरमन डेली (Herman Daly) के अनुसार, नवीकरणीय संसाधनों के निष्कर्षण की दर उनके पुनर्जनन की दर से अधिक नहीं होनी चाहिए, जबकि अनवीकरणीय संसाधनों के क्षय की दर नवीकरणीय विकल्पों के विकास की दर से अधिक नहीं होनी चाहिए। संसाधनों का अत्यधिक दोहन (Overexploitation) और अवशोषण क्षमता से अधिक प्रदूषण पर्यावरणीय संकट (Environmental Crisis) उत्पन्न कर सकते हैं। ब्रुंटलैंड आयोग (Brundtland Commission) की 1987 की रिपोर्ट Our Common Future के अनुसार, सतत विकास वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को इस प्रकार पूरा करता है कि भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताएँ पूरी करने की क्षमता से समझौता न हो।