Previous Year Question
नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): CO₂, SO₂ और NO₂ जैसी गैसें वर्षा जल में घुल जाती हैं और अम्लीय वर्षा उत्पन्न करती हैं।
कारण (R): कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड जैसी गैसों की उच्च सांद्रता के कारण वायुमंडलीय वायु प्रदूषित होती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(A) गलत है, किन्तु (R) सही है।
(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(A) सही है, किन्तु (R) गलत है।
Correct Answer: A
Detailed Solution
अभिकथन (A) सत्य है। अम्लीय वर्षा (Acid Rain) वह वर्षा है, जिसका pH सामान्य वर्षा जल की तुलना में अधिक अम्लीय, सामान्यतः 5.6 से कम होता है। वायुमंडल में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOₓ) जलवाष्प तथा अन्य वायुमंडलीय घटकों से रासायनिक अभिक्रिया करके क्रमशः सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) और नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) बनाते हैं। ये अम्ल वर्षा, हिमपात अथवा कोहरे के माध्यम से पृथ्वी की सतह तक पहुँच सकते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) भी जल में घुलकर दुर्बल कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃) बनाती है, लेकिन सामान्य अम्लीय वर्षा के प्रमुख प्रदूषणजनित कारण SO₂ और NOₓ हैं।
कारण (R) भी सत्य है। वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों की अत्यधिक सांद्रता पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न कर सकती है। SO₂ मुख्यतः कोयला एवं सल्फरयुक्त जीवाश्म ईंधनों के दहन तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलती है, जबकि NOₓ का उत्सर्जन वाहनों, ताप विद्युत संयंत्रों और उच्च तापमान पर होने वाले दहन से होता है। CO₂ जीवाश्म ईंधनों के दहन और अन्य मानवीय गतिविधियों से बढ़ने वाली प्रमुख ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse Gas) है। वायुमंडल में विशेष रूप से SO₂ और NOₓ की अधिक उपलब्धता अम्ल निर्माण की प्रक्रियाओं को बढ़ावा देती है, जिससे अम्लीय वर्षा की संभावना बढ़ती है।
अम्लीय वर्षा के निर्माण में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ (Chemical Reactions) गैसों और वायुमंडलीय नमी के संबंध को स्पष्ट करती हैं। CO₂ जल से अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल बनाती है: CO₂ + H₂O ⇌ H₂CO₃। सल्फर डाइऑक्साइड के ऑक्सीकरण और जल के साथ अभिक्रिया की समग्र प्रक्रिया को 2SO₂ + O₂ + 2H₂O → 2H₂SO₄ से व्यक्त किया जा सकता है। इसी प्रकार नाइट्रोजन डाइऑक्साइड से नाइट्रिक अम्ल बनने की समग्र अभिक्रिया 4NO₂ + O₂ + 2H₂O → 4HNO₃ है। सामान्य वर्षा का pH लगभग 5.6 होता है, जिसका प्रमुख कारण प्राकृतिक CO₂ से बनने वाला कार्बोनिक अम्ल है। सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल की अतिरिक्त उपस्थिति वर्षा जल के pH को और कम कर सकती है।
अम्लीय वर्षा का प्रभाव मृदा (Soil), जलीय पारिस्थितिक तंत्र (Aquatic Ecosystems), वनस्पतियों और ऐतिहासिक संरचनाओं पर पड़ता है। यह मृदा से आवश्यक पोषक तत्त्वों का निक्षालन (Nutrient Leaching) बढ़ा सकती है तथा झीलों और नदियों का pH घटाकर जलीय जीवों को प्रभावित कर सकती है। अम्लीय निक्षेपण (Acid Deposition) संगमरमर और चूना पत्थर जैसी कैल्शियम कार्बोनेटयुक्त संरचनाओं के क्षरण को भी तेज कर सकता है। अम्लीय पदार्थ वर्षा और हिमपात के साथ आर्द्र निक्षेपण (Wet Deposition) अथवा गैसों और कणों के रूप में शुष्क निक्षेपण (Dry Deposition) द्वारा पृथ्वी तक पहुँचते हैं। SO₂ और NOₓ के उत्सर्जन को नियंत्रित करना इन प्रभावों को कम करने का प्रमुख उपाय है।