Previous Year Question
नीचे दो कथन हैं, जिसमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है –
अभिकथन (A) – देश के पर्यावरण को बनाये रखने के लिए जनसंख्या नियंत्रण आवश्यक है।
कारण (R) – जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण पर्यावरण संतुलन बना रहता है।
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए –
कूट –
(A) और (R) दोनों सत्य हैं किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(A) गलत है किन्तु (R) सत्य है
(A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(A) सत्य है किन्तु (R) गलत है
Correct Answer: D
Detailed Solution
अभिकथन (A) सही है। तीव्र जनसंख्या वृद्धि (Rapid Population Growth) प्राकृतिक संसाधनों की माँग बढ़ाकर पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न कर सकती है। जनसंख्या बढ़ने के साथ भोजन, पेयजल, भूमि, ऊर्जा और आवास की आवश्यकताएँ भी बढ़ती हैं। इससे कृषि विस्तार, वनों की कटाई (Deforestation), जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन तथा अपशिष्ट उत्पादन में वृद्धि हो सकती है। इसलिए जनसंख्या वृद्धि का स्थिरीकरण (Population Stabilization) पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास (Sustainable Development) में सहायक माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र की वर्ष 2022 की रिपोर्ट भी जनसंख्या वृद्धि और पर्यावरणीय संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच संबंध की पुष्टि करती है।
कारण (R) गलत है। जनसंख्या में तीव्र वृद्धि अपने आप पर्यावरणीय संतुलन (Environmental Balance) बनाए नहीं रखती। प्राकृतिक संसाधनों की खपत और भूमि उपयोग परिवर्तन बढ़ने से पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) प्रभावित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, प्राकृतिक वनों को कृषि भूमि या बस्तियों में बदलने से वन्यजीवों के आवास नष्ट होते हैं, जैव विविधता (Biodiversity) घट सकती है और मृदा अपरदन (Soil Erosion) बढ़ सकता है। इसी प्रकार भूजल का अत्यधिक दोहन जलस्तर में गिरावट तथा औद्योगिक एवं घरेलू अपशिष्ट जल और वायु प्रदूषण को बढ़ा सकते हैं।
पर्यावरण पर जनसंख्या का प्रभाव केवल लोगों की संख्या पर निर्भर नहीं करता। पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने के लिए IPAT मॉडल में जनसंख्या (Population—P), प्रति व्यक्ति उपभोग या समृद्धि (Affluence—A) और तकनीक (Technology—T) को प्रमुख कारक माना जाता है। इसका संबंध I = P × A × T से व्यक्त किया जाता है, जहाँ I पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental Impact) है। अधिक उपभोग और संसाधन-प्रधान तकनीक वाली अपेक्षाकृत कम जनसंख्या भी गंभीर पर्यावरणीय दबाव उत्पन्न कर सकती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हाल के दशकों में बढ़ता प्रति व्यक्ति उपभोग संसाधनों की माँग में वृद्धि का महत्वपूर्ण कारण रहा है।
जनसंख्या स्थिरीकरण और पर्यावरण संरक्षण के लिए शिक्षा, स्वैच्छिक परिवार नियोजन (Voluntary Family Planning), प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता तथा महिलाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), जल संरक्षण, संसाधन दक्षता (Resource Efficiency), प्रदूषण नियंत्रण और सतत उपभोग को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र की वर्ष 1994 की अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या एवं विकास सम्मेलन (ICPD) की कार्ययोजना ने जनसंख्या संबंधी निर्णयों में व्यक्तिगत अधिकारों और स्वतंत्र चयन पर बल दिया था। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसंख्या के साथ-साथ उपभोग, तकनीक और संसाधन प्रबंधन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।