JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2021

Previous Year Question

‘कार्बन क्रेडिट’ की अवधारणा उत्पन्न हुई

A.

अर्थ समिट, रियो-डे-जेनिरो

B.

क्योटो प्रोटोकॉल

C.

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल

D.

जी-8 समिट, हैलीजेंडम

Correct Answer: B

Detailed Solution

कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit) की अवधारणा को अंतरराष्ट्रीय जलवायु नीति में औपचारिक आधार क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) से मिला। इसे 11 दिसंबर 1997 को जापान के क्योटो शहर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क अभिसमय (UNFCCC) के तीसरे पक्षकार सम्मेलन (COP3) में अपनाया गया था। यह 16 फरवरी 2005 को प्रभावी हुआ। इसके अंतर्गत विकसित देशों और संक्रमणशील अर्थव्यवस्थाओं के निर्दिष्ट समूह के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किए गए।

कार्बन क्रेडिट सामान्यतः एक व्यापार योग्य इकाई (Tradable Unit) है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में सत्यापित कटौती अथवा वायुमंडल से उसके निराकरण (Removal) को दर्शाती है। इसे प्रायः कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य (CO₂-equivalent) के मीट्रिक टन में मापा जाता है। विनियमित कार्बन बाजारों (Regulated Carbon Markets) में उत्सर्जन अनुमति (Emission Allowance) और परियोजनाओं से प्राप्त उत्सर्जन कटौती क्रेडिट (Emission Reduction Credit) अलग-अलग साधन हैं। क्योटो प्रोटोकॉल ने बाजार-आधारित व्यवस्थाएँ विकसित कीं, जिनके माध्यम से पात्र देश अपनी उत्सर्जन कटौती संबंधी प्रतिबद्धताओं का कुछ भाग पूरा कर सकते थे।

क्योटो प्रोटोकॉल ने तीन प्रमुख बाजार-आधारित तंत्र स्थापित किए—स्वच्छ विकास तंत्र (Clean Development Mechanism—CDM), संयुक्त क्रियान्वयन (Joint Implementation—JI) और अंतरराष्ट्रीय उत्सर्जन व्यापार (International Emissions Trading)। CDM के अंतर्गत विकासशील देशों में उत्सर्जन घटाने वाली परियोजनाओं से प्रमाणित उत्सर्जन कटौती (Certified Emission Reductions—CERs) अर्जित की जा सकती थी। एक CER एक मीट्रिक टन CO₂-समतुल्य उत्सर्जन कटौती को दर्शाता है। इन क्रेडिटों का उपयोग क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत निर्धारित उत्सर्जन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए किया जा सकता था।

अन्य विकल्पों में, रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Rio Earth Summit, 1992) में UNFCCC को हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय जलवायु सहयोग का आधार तैयार किया। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol, 1987) का प्रमुख उद्देश्य ओजोन परत को क्षति पहुँचाने वाले पदार्थों के उत्पादन और उपभोग को चरणबद्ध रूप से समाप्त करना है। जी-8 हैलीगेंडाम शिखर सम्मेलन (G8 Heiligendamm Summit, 2007) में जलवायु परिवर्तन और उत्सर्जन कटौती पर चर्चा हुई, लेकिन कार्बन क्रेडिट की व्यवस्था इससे पहले ही क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत विकसित हो चुकी थी।

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