Previous Year Question
2050 के लिये ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
इसका अभिप्राय है कि देश को 2050 तक उसके उत्सर्जन को शून्य तक नीचे लाना होगा।
इसका अभिप्राय है कि किसी देश के उत्सर्जन की क्षतिपूर्ति वातावरण से ग्रीन हाउस गैसों का निराकरण तथा अवशोषण से होगी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए।
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 गलत है। नेट-जीरो उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का अर्थ किसी देश द्वारा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन पूर्णतः शून्य कर देना नहीं है। इसका अर्थ है कि देश के शेष उत्सर्जन (Residual Emissions) को वायुमंडल से समतुल्य मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें हटाकर संतुलित किया जाए। इसलिए सकल शून्य उत्सर्जन (Gross-Zero Emissions) और शुद्ध शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। वर्ष 2050 एक महत्वपूर्ण वैश्विक जलवायु लक्ष्य से संबंधित है, लेकिन सभी देशों के लिए नेट-जीरो प्राप्त करने की समयसीमा समान नहीं है।
कथन 2 सही है। नेट-जीरो की स्थिति तब प्राप्त होती है, जब मानवजनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Anthropogenic Greenhouse Gas Emissions) को वायुमंडल से ग्रीनहाउस गैसों के निराकरण (Greenhouse Gas Removals) द्वारा संतुलित कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी देश का वार्षिक उत्सर्जन 100 मिलियन टन CO₂-समतुल्य (CO₂-equivalent) है और उसी अवधि में 100 मिलियन टन CO₂-समतुल्य का वास्तविक निराकरण किया जाता है, तो उसका शुद्ध उत्सर्जन शून्य होगा। इसमें उत्सर्जन जारी रह सकता है, लेकिन वायुमंडल में उसका शुद्ध योगदान शून्य हो जाता है।
नेट-जीरो प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम जीवाश्म ईंधनों का उपयोग घटाकर, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) और स्वच्छ तकनीकों के माध्यम से उत्सर्जन में व्यापक कटौती की जाती है। इसके बाद शेष उत्सर्जन को संतुलित करने के लिए वनरोपण (Afforestation), पुनर्वनीकरण (Reforestation), मृदा कार्बन संचयन (Soil Carbon Sequestration) और प्रत्यक्ष वायु से कार्बन अभिग्रहण एवं भंडारण (Direct Air Carbon Capture and Storage—DACCS) जैसी विधियाँ अपनाई जा सकती हैं। केवल उत्सर्जन से बचना और वातावरण से पहले से उत्सर्जित गैसों को हटाना अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।
वर्ष 2050 का लक्ष्य वैश्विक तापवृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से लगभग 1.5°C तक सीमित रखने के प्रयासों से संबंधित है। IPCC की वर्ष 2018 की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस लक्ष्य के अनुकूल वैश्विक मार्गों में मानवजनित CO₂ के शुद्ध उत्सर्जन को वर्ष 2010 के स्तर से 2030 तक लगभग 45 प्रतिशत घटाकर 2050 के आसपास नेट-जीरो तक पहुँचाना आवश्यक है। अलग-अलग देशों की समयसीमा अलग हो सकती है। भारत ने नवंबर 2021 में ग्लासगो COP26 के दौरान वर्ष 2070 तक नेट-जीरो प्राप्त करने का लक्ष्य घोषित किया था।