Previous Year Question
नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A) : पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न अवयव एक-दूसरे पर निर्भर नहीं हैं।
कारण (R) : मानव क्रियाओं का पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
(A) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
(A) तथा (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(A) सही है, परन्तु (R) गलत है।
(A) गलत है, परन्तु (R) सही है।
Correct Answer: D
Detailed Solution
अभिकथन (A) गलत है। पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) एक क्रियात्मक इकाई है, जिसमें जैविक (Biotic) और अजैविक (Abiotic) घटक परस्पर निर्भर तथा एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। जैविक घटकों में उत्पादक (Producers), उपभोक्ता (Consumers) और अपघटक (Decomposers) शामिल हैं, जबकि अजैविक घटकों में सूर्य का प्रकाश, जल, वायु, मृदा, तापमान और खनिज आते हैं। इन घटकों की पारस्परिक क्रियाएँ ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow), पोषक चक्रण (Nutrient Cycling) तथा पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पारस्परिक निर्भरता (Interdependence) को खाद्य शृंखला (Food Chain) के माध्यम से समझा जा सकता है। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन तैयार करते हैं, शाकाहारी जीव पौधों से ऊर्जा प्राप्त करते हैं तथा मांसाहारी जीव अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। मृत जीवों और जैविक अवशेषों का अपघटन जीवाणु एवं कवक करते हैं, जिससे पोषक तत्त्व पुनः मिट्टी और पर्यावरण में पहुँचते हैं। उदाहरण के लिए, घास → हिरण → बाघ की खाद्य शृंखला में घास की उपलब्धता घटने पर हिरणों की आबादी और उसके बाद बाघों की खाद्य उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
कारण (R) सही है। मानवीय गतिविधियाँ (Human Activities) पर्यावरण के जैविक तथा अजैविक दोनों घटकों को प्रभावित करती हैं। वनों की कटाई (Deforestation), औद्योगिकीकरण (Industrialization), नगरीकरण (Urbanization), प्रदूषण और जीवाश्म ईंधनों का दहन प्राकृतिक आवासों, जलवायु तथा जैव विविधता में परिवर्तन उत्पन्न कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जंगलों की कटाई से वन्यजीवों के आवास नष्ट होते हैं, मृदा अपरदन (Soil Erosion) बढ़ सकता है और स्थानीय जलचक्र (Water Cycle) प्रभावित हो सकता है। IPBES की 2019 की वैश्विक आकलन रिपोर्ट ने भूमि उपयोग परिवर्तन, जीवों के प्रत्यक्ष दोहन, जलवायु परिवर्तन तथा प्रदूषण को प्रकृति में परिवर्तन के प्रमुख कारकों में शामिल किया है।
अभिकथन और कारण के बीच अंतर यह है कि अभिकथन पारिस्थितिकी तंत्र के घटकों की पारस्परिक निर्भरता से संबंधित है, जबकि कारण पर्यावरण पर मानवीय गतिविधियों के प्रभाव को बताता है। पारिस्थितिकी तंत्र में किसी एक घटक का परिवर्तन अन्य घटकों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि वे खाद्य जाल (Food Web), ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्रों के माध्यम से जुड़े होते हैं। मानव द्वारा वृक्षारोपण (Afforestation), आवास पुनर्स्थापन (Habitat Restoration) और प्रदूषण नियंत्रण जैसी गतिविधियाँ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हो सकती हैं। इस प्रकार अभिकथन गलत तथा कारण सही है।