Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सा एक वन्यप्राणियों के विलुप्तीकरण का प्रमुख कारण नहीं है?
प्राकृतिक आवास का नष्ट होना
जंगलों में आग लगा देना
वन्यप्राणियों का अवैध वाणिज्यिक व्यापार
जनसंख्या की तीव्र वृद्धि
Correct Answer: D
Detailed Solution
वन्यप्राणियों का विलुप्तीकरण (Wildlife Extinction) वह स्थिति है, जिसमें किसी प्रजाति के सभी जीवित सदस्य पृथ्वी से समाप्त हो जाते हैं। इसके प्रमुख प्रत्यक्ष कारणों (Direct Drivers) में प्राकृतिक आवासों का विनाश, अत्यधिक शिकार, वन्यजीवों का अवैध व्यापार, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ शामिल हैं। जनसंख्या की तीव्र वृद्धि (Rapid Human Population Growth) इन कारणों को बढ़ावा दे सकती है, लेकिन इसे सामान्यतः एक अप्रत्यक्ष कारक (Indirect Driver) माना जाता है।
प्राकृतिक आवास का विनाश (Habitat Destruction) वन्यजीवों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। वनों की कटाई, कृषि विस्तार, नगरीकरण, खनन तथा सड़क निर्माण से जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट या खंडित (Fragmented) हो जाते हैं। इससे भोजन, आश्रय, प्रजनन स्थलों और आवागमन के प्राकृतिक मार्गों की उपलब्धता कम हो जाती है। छोटे एवं अलग-थलग पड़े जीव-समूहों में आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) घटने और स्थानीय विलुप्ति (Local Extinction) का जोखिम बढ़ सकता है।
जंगलों में आग लगाना (Forest Burning) और वन्यजीवों का अवैध वाणिज्यिक व्यापार (Illegal Commercial Wildlife Trade) भी विलुप्तीकरण के प्रत्यक्ष कारण बन सकते हैं। जानबूझकर लगाई गई अनियंत्रित आग वनस्पतियों, घोंसलों, प्रजनन स्थलों और वन्यजीवों को नुकसान पहुँचा सकती है। हालाँकि कुछ पारिस्थितिक तंत्रों में प्राकृतिक आग पुनर्जनन के लिए आवश्यक भी होती है। इसी प्रकार हाथीदाँत, सींग, खाल तथा अन्य वन्यजीव उत्पादों के लिए अवैध शिकार से संबंधित प्रजातियों की आबादी घटती है। CITES (1973) संकटग्रस्त वन्य जीव-जंतुओं और पौधों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विनियमित करने वाला प्रमुख समझौता है।
जनसंख्या की तीव्र वृद्धि वन्यजीव विलुप्तीकरण का अप्रत्यक्ष कारण है। जनसंख्या बढ़ने से भूमि, भोजन, आवास और प्राकृतिक संसाधनों की माँग बढ़ सकती है, जिससे कृषि विस्तार, वनों की कटाई और प्राकृतिक आवासों पर दबाव उत्पन्न होता है। हालाँकि पर्यावरणीय क्षति केवल जनसंख्या के आकार पर निर्भर नहीं करती; उपभोग के स्वरूप, तकनीक और संसाधन प्रबंधन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। IPBES के वैश्विक आकलन (2019) में मानव जनसंख्या की गतिशीलता को अप्रत्यक्ष कारकों में रखा गया है, जबकि भूमि-उपयोग परिवर्तन और जीवों का प्रत्यक्ष दोहन प्रमुख प्रत्यक्ष कारक हैं।