JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2019

Previous Year Question

गैस, जो धान के खेत से उत्सर्जित होती है तथा भूमि के तापमान में वृद्धि करती है, वह है

A.

नाइट्रोजन

B.

कार्बन डाइऑक्साइड

C.

कार्बन मोनोऑक्साइड

D.

मिथेन

Correct Answer: D

Detailed Solution

मिथेन (Methane—CH₄) एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse Gas) है, जिसका उत्सर्जन जलमग्न धान के खेतों (Flooded Paddy Fields) से होता है। धान की पारंपरिक खेती में खेत लंबे समय तक पानी से भरे रहते हैं, जिससे मिट्टी में ऑक्सीजन की उपलब्धता कम हो जाती है और अवायवीय परिस्थितियाँ (Anaerobic Conditions) विकसित होती हैं। इन परिस्थितियों में कार्बनिक पदार्थों के सूक्ष्मजीवी अपघटन के दौरान मिथेन उत्पन्न होती है। यह गैस वायुमंडल में अवरक्त विकिरण (Infrared Radiation) को अवशोषित करके हरितगृह प्रभाव और वैश्विक तापवृद्धि (Global Warming) में योगदान देती है।

मिथेन उत्पादन की प्रक्रिया (Methanogenesis) मुख्यतः मिथेनोजेनिक आर्किया (Methanogenic Archaea) द्वारा संपन्न होती है। ये सूक्ष्मजीव ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बनिक पदार्थों के अपघटन से बनने वाले यौगिकों का उपयोग करके मिथेन उत्पन्न करते हैं। उत्पन्न मिथेन मिट्टी से जल के बुलबुलों (Gas Bubbles), विसरण (Diffusion) तथा धान के पौधों के वायुयुक्त ऊतकों (Aerenchyma) के माध्यम से वायुमंडल में पहुँचती है। धान की जड़ों और तनों में उपस्थित ये वायुयुक्त ऊतक जलमग्न परिस्थितियों में गैसों के परिवहन में सहायता करते हैं।

मिथेन की वैश्विक तापन क्षमता (Global Warming Potential—GWP) कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की तुलना में काफी अधिक है। IPCC के छठे आकलन के अनुसार, जैविक स्रोतों से उत्पन्न मिथेन की 100 वर्षों की अवधि में वैश्विक तापन क्षमता लगभग 27.2 गुना है। मिथेन के अन्य प्रमुख स्रोतों में आर्द्रभूमियाँ (Wetlands), जुगाली करने वाले पशुओं का पाचन (Enteric Fermentation), कचरा भराव स्थल (Landfills) तथा जीवाश्म ईंधनों का उत्पादन शामिल हैं। इसके विपरीत, नाइट्रोजन (N₂) ग्रीनहाउस गैस नहीं है, जबकि कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) मुख्यतः एक विषैला वायु प्रदूषक है।

धान की खेती से मिथेन उत्सर्जन कम करने के लिए वैकल्पिक गीलापन एवं सुखापन तकनीक (Alternate Wetting and Drying—AWD) का उपयोग किया जा सकता है। इसमें खेत को लगातार जलमग्न रखने के बजाय निर्धारित अंतराल पर पानी निकालकर मिट्टी में ऑक्सीजन का प्रवेश कराया जाता है, जिससे मिथेन उत्पादन घटता है। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (International Rice Research Institute—IRRI) के अनुसार, उपयुक्त परिस्थितियों में इस तकनीक से मिथेन उत्सर्जन में लगभग 30–70 प्रतिशत कमी संभव है। हालाँकि जल प्रबंधन में परिवर्तन के दौरान नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) उत्सर्जन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

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