Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सा वायुप्रदूषण के जैविक सूचक का प्रसिद्ध उदाहरण है ?
लाइकेन्स
मेथिल मरक्यरि
गुलाब का पौधा
सूरजमुखी का पुष्प
Correct Answer: A
Detailed Solution
लाइकेन (Lichen) वायु प्रदूषण के प्रसिद्ध जैविक सूचक (Bioindicator) हैं। जैविक सूचक ऐसे जीव होते हैं, जिनकी उपस्थिति, अनुपस्थिति, संख्या या शारीरिक स्थिति से पर्यावरण की गुणवत्ता का अनुमान लगाया जाता है। लाइकेन सामान्यतः कवक (Fungus) और शैवाल (Algae) अथवा सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria) के सहजीवी संबंध (Symbiotic Association) से बनते हैं। इनमें कवक संरक्षण और संरचनात्मक आधार प्रदान करता है, जबकि प्रकाश संश्लेषी सहयोगी भोजन का निर्माण करता है।
लाइकेन विशेष रूप से सल्फर डाइऑक्साइड (Sulfur Dioxide—SO₂) और कुछ अन्य वायुमंडलीय प्रदूषकों के प्रति संवेदनशील होते हैं। इनमें वास्तविक जड़ें नहीं होतीं और ये जल तथा खनिज पोषक तत्त्व मुख्यतः वायुमंडलीय निक्षेपण (Atmospheric Deposition) से प्राप्त करते हैं। इनके ऊतकों में SO₂, नाइट्रोजन यौगिकों और भारी धातुओं (Heavy Metals) का संचय हो सकता है। प्रदूषकों की अधिकता से प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है, वृद्धि धीमी पड़ सकती है तथा संवेदनशील लाइकेन प्रजातियाँ नष्ट हो सकती हैं।
वायु गुणवत्ता निगरानी (Air Quality Monitoring) में लाइकेन की विभिन्न प्रजातियों की उपस्थिति, विविधता और स्वास्थ्य का अध्ययन किया जाता है। सामान्यतः कम प्रदूषण वाले क्षेत्रों में संवेदनशील लाइकेन प्रजातियाँ अधिक मिल सकती हैं, जबकि प्रदूषित क्षेत्रों में उनकी संख्या घट सकती है और प्रदूषण-सहिष्णु प्रजातियाँ (Pollution-tolerant Species) प्रमुख हो सकती हैं। हालाँकि लाइकेन की अनुपस्थिति केवल प्रदूषण का प्रमाण नहीं है, क्योंकि तापमान, नमी, वृक्षों की छाल और आवासीय परिस्थितियाँ भी इनके वितरण को प्रभावित करती हैं।
अन्य विकल्पों में मिथाइल मरकरी (Methylmercury—CH₃Hg⁺) पारे का एक विषैला कार्बनिक रूप है, जो जलीय खाद्य शृंखलाओं में जैवसंचयन (Bioaccumulation) और जैवआवर्धन (Biomagnification) का कारण बन सकता है। गुलाब (Rose) और सूरजमुखी (Sunflower) सामान्य पुष्पीय पौधे हैं। यद्यपि कुछ पौधों का उपयोग प्रदूषण के प्रभावों के अध्ययन में किया जा सकता है, लेकिन वायु प्रदूषण के जैविक सूचक के रूप में लाइकेन विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इनका उपयोग सल्फर, नाइट्रोजन तथा कुछ भारी धातुओं से संबंधित प्रदूषण की निगरानी में किया जाता है।