JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2019

Previous Year Question

इकोसिस्टम के संबंध में निम्न में से क्या सत्य है?

A.

प्राथमिक उपभोक्ता उत्पादक पर न्यूनतम रूप से आश्रित हैं।

B.

प्राथमिक उपभोक्ता उत्पादकों से संख्या में अधिक होते हैं

C.

उत्पादक, प्राथमिक उपभोक्ता से अधिक हैं

D.

द्वितीयक उपभोक्ता अधिकतम होने के साथ-साथ बहुत ही शक्तिशाली हैं

Correct Answer: C

Detailed Solution

पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) में जीवों को उनकी पोषण संबंधी भूमिका के आधार पर उत्पादक (Producers), प्राथमिक उपभोक्ता (Primary Consumers), द्वितीयक उपभोक्ता (Secondary Consumers) तथा उच्चतर उपभोक्ताओं में विभाजित किया जाता है। उत्पादक पारिस्थितिक तंत्र की खाद्य शृंखला (Food Chain) का आधार होते हैं। हरे पौधे, शैवाल और सायनोबैक्टीरिया जैसे स्वपोषी जीव (Autotrophs) प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के माध्यम से सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करके भोजन का निर्माण करते हैं। प्राथमिक उपभोक्ता मुख्यतः शाकाहारी जीव होते हैं, जो भोजन के लिए सीधे उत्पादकों पर निर्भर रहते हैं।

पारिस्थितिक पिरामिड (Ecological Pyramid) विभिन्न पोषण स्तरों पर जीवों की संख्या, जैवभार (Biomass) अथवा ऊर्जा (Energy) को प्रदर्शित करता है। सामान्य घासभूमि पारिस्थितिक तंत्र में संख्या का पिरामिड (Pyramid of Numbers) सीधा होता है, जिसमें उत्पादकों की संख्या प्राथमिक उपभोक्ताओं से और प्राथमिक उपभोक्ताओं की संख्या द्वितीयक उपभोक्ताओं से अधिक होती है। उदाहरण के लिए, घास → टिड्डा → मेंढक → साँप की खाद्य शृंखला में घास उत्पादक, टिड्डा प्राथमिक उपभोक्ता तथा मेंढक द्वितीयक उपभोक्ता है।

ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow) के दौरान प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा का बड़ा भाग श्वसन, जैविक गतिविधियों और ऊष्मा के रूप में खर्च हो जाता है। लिंडमैन के 10 प्रतिशत नियम (Lindeman's Ten Percent Law) के अनुसार, औसतन लगभग 10 प्रतिशत ऊर्जा अगले पोषण स्तर तक पहुँचती है। इसलिए ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) हमेशा सीधा होता है। उदाहरण के लिए, उत्पादकों के स्तर पर 10,000 जूल ऊर्जा उपलब्ध होने पर प्राथमिक उपभोक्ताओं को लगभग 1,000 जूल तथा द्वितीयक उपभोक्ताओं को लगभग 100 जूल ऊर्जा प्राप्त हो सकती है। ऊर्जा में यह कमी उच्च पोषण स्तरों पर जीवों को सहारा देने की क्षमता सीमित करती है।

संख्या का पिरामिड हमेशा सीधा नहीं होता। उदाहरण के लिए, वन पारिस्थितिक तंत्र में एक विशाल वृक्ष (उत्पादक) पर अनेक कीट (प्राथमिक उपभोक्ता) निर्भर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में संख्या का पिरामिड उल्टा (Inverted Pyramid) बन सकता है। इसी प्रकार जलीय पारिस्थितिक तंत्र में पादप प्लवक (Phytoplankton) का स्थायी जैवभार प्राणी प्लवक (Zooplankton) से कम हो सकता है, जिससे जैवभार का पिरामिड उल्टा होता है। इसलिए उत्पादकों की संख्या अधिक होना अधिकांश पारिस्थितिक तंत्रों की सामान्य प्रवृत्ति है, सार्वभौमिक नियम नहीं।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.