Previous Year Question
सबसे अधिक स्थिर पारिस्थितिकी तंत्र कौन-सा है ?
सागरीय (महासागर)
वन
पर्वतीय
मरुस्थलीय
Correct Answer: A
Detailed Solution
सागरीय पारिस्थितिक तंत्र (Marine Ecosystem) को दिए गए विकल्पों में सबसे अधिक स्थिर पारिस्थितिक तंत्र माना जाता है। पारिस्थितिक स्थिरता (Ecological Stability) का अर्थ पर्यावरणीय परिवर्तनों के बावजूद किसी पारिस्थितिक तंत्र की संरचना और कार्यप्रणाली को बनाए रखने या व्यवधान के बाद पुनः सामान्य अवस्था प्राप्त करने की क्षमता है। महासागर पृथ्वी की सतह के लगभग 71 प्रतिशत भाग पर विस्तृत हैं। जल की विशाल मात्रा और गहराई के कारण महासागरों में अनेक पर्यावरणीय परिवर्तन अपेक्षाकृत धीमी गति से होते हैं।
जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा धारिता (High Specific Heat Capacity) समुद्री पारिस्थितिक तंत्र की भौतिक स्थिरता का एक प्रमुख कारण है। जल अपना तापमान अधिक बदले बिना बड़ी मात्रा में ऊष्मा अवशोषित और मुक्त कर सकता है। इसके अतिरिक्त समुद्री धाराएँ (Ocean Currents), ज्वार-भाटा (Tides) और जल का मिश्रण (Water Mixing) ऊष्मा तथा पोषक तत्त्वों के वितरण में योगदान देते हैं। महासागर पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। NASA के अनुसार वैश्विक तापवृद्धि से उत्पन्न अतिरिक्त ऊष्मा का लगभग 90 प्रतिशत भाग महासागरों द्वारा अवशोषित किया गया है।
सागरीय खाद्य जाल (Marine Food Web) में पादप प्लवक (Phytoplankton), प्राणी प्लवक (Zooplankton), मछलियाँ, समुद्री स्तनधारी और अपघटक शामिल होते हैं। पादप प्लवक प्रकाश संश्लेषण द्वारा प्राथमिक उत्पादक (Primary Producers) की भूमिका निभाते हैं तथा समुद्री खाद्य शृंखलाओं का आधार बनते हैं। महासागरों में तापमान, लवणता (Salinity), घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) और पोषक तत्त्वों की उपलब्धता के आधार पर विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्र विकसित होते हैं। विशेष रूप से गहरे समुद्री क्षेत्रों में सतह की तुलना में दैनिक तापमान परिवर्तन सामान्यतः कम होते हैं।
वन (Forest), पर्वतीय (Mountain) और मरुस्थलीय (Desert) पारिस्थितिक तंत्र भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी पर्यावरणीय परिस्थितियाँ अलग-अलग होती हैं। वनों में मौसमी परिवर्तन, आग और भूमि उपयोग परिवर्तन का प्रभाव पड़ सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में ऊँचाई के साथ तापमान और अन्य जलवायवीय परिस्थितियाँ तेजी से बदलती हैं, जबकि मरुस्थलों में जल की कमी तथा दैनिक तापमान में अत्यधिक अंतर प्रमुख विशेषताएँ हैं। हालाँकि समुद्री स्थिरता का अर्थ यह नहीं है कि महासागर पर्यावरणीय परिवर्तनों से अप्रभावित हैं। वर्तमान में समुद्री तापवृद्धि (Ocean Warming), महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification) और प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) इनके पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं।