Previous Year Question
रानी झांसी समुद्री राष्ट्रीय पार्क की स्थापना हुई थी :
1994
1995
1996
1997
Correct Answer: C
Detailed Solution
रानी झाँसी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान (Rani Jhansi Marine National Park) की स्थापना 1996 में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में की गई थी। यह बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री संरक्षित क्षेत्र (Marine Protected Area) है। इसका नाम वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai) के सम्मान में रखा गया है। इस राष्ट्रीय उद्यान का मुख्य उद्देश्य समुद्री जैव विविधता, तटीय पारिस्थितिक तंत्रों तथा संकटग्रस्त समुद्री जीवों का संरक्षण करना है।
यह राष्ट्रीय उद्यान रिची द्वीपसमूह (Ritchie's Archipelago) के अंतर्गत स्थित है। इसमें जॉन लॉरेंस द्वीप (John Lawrence Island), हेनरी लॉरेंस द्वीप (Henry Lawrence Island) और आउटरम द्वीप (Outram Island) सहित अनेक द्वीपीय क्षेत्र शामिल हैं। यहाँ प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs), मैंग्रोव वन (Mangrove Forests), उष्णकटिबंधीय वन (Tropical Forests) तथा उथले समुद्री जल के आवास पाए जाते हैं। ये पारिस्थितिक तंत्र विभिन्न समुद्री जीवों को भोजन, आश्रय और प्रजनन स्थल प्रदान करते हैं।
इस उद्यान में डुगोंग (Dugong), समुद्री कछुए (Sea Turtles), खारे पानी के मगरमच्छ (Saltwater Crocodiles), विभिन्न मछलियाँ तथा प्रवाल (Corals) जैसे जीव पाए जाते हैं। डुगोंग एक शाकाहारी समुद्री स्तनधारी है, जो मुख्यतः समुद्री घास (Seagrass) पर निर्भर करता है। प्रवाल भित्तियाँ समुद्री जीवों के लिए महत्वपूर्ण प्रजनन और आश्रय स्थल हैं। मैंग्रोव वन तटीय कटाव को कम करने, मछलियों के प्रारंभिक विकास तथा समुद्री जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान (Mahatma Gandhi Marine National Park) भी स्थित है, जिसकी स्थापना 1983 में हुई थी। यह दक्षिण अंडमान के वांडूर (Wandoor) क्षेत्र में स्थित है और प्रवाल भित्तियों तथा समुद्री जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। रानी झाँसी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना इसके बाद 1996 में हुई। दोनों राष्ट्रीय उद्यान समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। जलवायु परिवर्तन, प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching), समुद्री प्रदूषण तथा अनियंत्रित मानवीय गतिविधियाँ इन संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों के लिए खतरा उत्पन्न कर सकती हैं।