JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2017

Previous Year Question

वर्षा की मात्रा निर्भर करती है :

A.

हवा के दबाव पर

B.

वायुमण्डल में नमी पर

C.

जल-चक्र पर

D.

तापक्रम पर

Correct Answer: B

Detailed Solution

वर्षा (Rainfall) वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प (Water Vapour) के संघनन (Condensation) से बनने वाली जल की बूंदों के पृथ्वी की सतह पर गिरने की प्रक्रिया है। वर्षा के लिए वायुमंडल में पर्याप्त नमी (Atmospheric Moisture) का होना आवश्यक है। वायु में जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता (Humidity) कहा जाता है। वायुमंडल में उपलब्ध नमी वर्षा की संभावित मात्रा का प्रमुख निर्धारक है, क्योंकि यही बादलों और वर्षा के लिए जल का स्रोत होती है। हालाँकि अधिक आर्द्रता होने मात्र से वर्षा होना आवश्यक नहीं है।

वर्षा निर्माण की प्रक्रिया में नम वायु ऊपर उठकर फैलती है और सामान्यतः ठंडी होती जाती है। जब उसका तापमान ओसांक (Dew Point) तक पहुँचता है, तो जलवाष्प संघनन नाभिकों (Condensation Nuclei), जैसे धूल और लवण के सूक्ष्म कणों, पर संघनित होकर बादलों की छोटी बूंदों का निर्माण करती है। ये बूंदें परस्पर टकराकर और मिलकर बड़ी हो सकती हैं। जब बूंदों का आकार इतना बढ़ जाता है कि वायु की ऊपर उठाने वाली शक्ति उन्हें संभाल नहीं पाती, तब वे वर्षा के रूप में पृथ्वी की सतह पर गिरती हैं। पर्याप्त वर्षा के लिए नमी की निरंतर आपूर्ति और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियाँ आवश्यक हैं।

वायुदाब (Air Pressure), तापमान (Temperature) और जल चक्र (Water Cycle) भी वर्षा को प्रभावित करते हैं, लेकिन इनकी भूमिकाएँ अलग-अलग हैं। निम्न वायुदाब वाले क्षेत्रों में वायु का ऊपर उठना बादलों के निर्माण में सहायक होता है। तापमान वायु की संतृप्त जलवाष्प मात्रा तथा संघनन की परिस्थितियों को प्रभावित करता है। जल चक्र में वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण और जल के पुनः संग्रहण की प्रक्रियाएँ सम्मिलित होती हैं। इसलिए वर्षा की वास्तविक मात्रा नमी की उपलब्धता के साथ-साथ वायु के उत्थान, शीतलन और बादलों की सूक्ष्मभौतिक प्रक्रियाओं पर भी निर्भर करती है।

भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) वायुमंडलीय नमी और वर्षा के संबंध का प्रमुख उदाहरण है। मानसूनी पवनें अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में जलवाष्प लेकर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ती हैं। जब ये नम पवनें पश्चिमी घाट या हिमालय जैसी पर्वतश्रेणियों से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो शीतलन और संघनन से पर्वतीय वर्षा (Orographic Rainfall) होती है। इस प्रकार पर्याप्त नमी की उपलब्धता, वायु का उत्थान और भौगोलिक परिस्थितियाँ मिलकर वर्षा के स्थानिक वितरण तथा मात्रा को प्रभावित करती हैं।

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