Previous Year Question
जैव-विविधता के ह्रास का मुख्य कारण है :
आवासीय प्रदूषण
विदेशज प्रजातियों का समावेश
अत्यधिक दोहन
प्राकृतिक आवासीय विनाश
Correct Answer: D
Detailed Solution
जैव विविधता का ह्रास (Biodiversity Loss) किसी क्षेत्र में प्रजातियों, उनकी आबादी तथा आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) में होने वाली कमी को दर्शाता है। इसका सबसे प्रमुख कारण प्राकृतिक आवासों का विनाश एवं विखंडन (Habitat Loss and Fragmentation) है। वनों की कटाई, कृषि भूमि का विस्तार, नगरीकरण, खनन, सड़क और बाँध निर्माण जैसी गतिविधियों से जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट या छोटे-छोटे भागों में विभाजित हो जाते हैं। इससे जीवों को भोजन, आश्रय, प्रजनन स्थल तथा अन्य आवश्यक संसाधन प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
आवासीय विखंडन (Habitat Fragmentation) के कारण पहले से जुड़े हुए वन, घासभूमि या आर्द्रभूमि के क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में बँट जाते हैं। इससे वन्यजीवों का आवागमन, प्रजनन तथा विभिन्न आबादियों के बीच जीन प्रवाह (Gene Flow) प्रभावित होता है। छोटी और अलग-थलग आबादियों में अंतःप्रजनन (Inbreeding), आनुवंशिक विविधता की कमी तथा स्थानीय विलुप्ति (Local Extinction) का जोखिम बढ़ सकता है। विखंडित आवासों के किनारों पर तापमान, प्रकाश, आर्द्रता और शिकारी जीवों की गतिविधियों में होने वाले परिवर्तनों को किनारा प्रभाव (Edge Effect) कहा जाता है, जो विशेष रूप से आवास के आंतरिक भाग पर निर्भर प्रजातियों को प्रभावित कर सकता है।
जैव विविधता के ह्रास के अन्य प्रमुख कारणों में अत्यधिक दोहन (Overexploitation), विदेशज आक्रामक प्रजातियाँ (Invasive Alien Species) और प्रदूषण (Pollution) शामिल हैं। अत्यधिक शिकार, मत्स्यन तथा वन संसाधनों का अनियंत्रित उपयोग जीवों की आबादी घटाता है। विदेशज आक्रामक प्रजातियाँ स्थानीय जीवों के साथ भोजन और आवास के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, जलकुंभी (Water Hyacinth—Pontederia crassipes) जल निकायों में तेजी से फैलकर स्थानीय जलीय वनस्पतियों और पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। इसी प्रकार औद्योगिक अपशिष्ट, कीटनाशक तथा उर्वरकों से उत्पन्न प्रदूषण जलीय एवं स्थलीय जैव विविधता को नुकसान पहुँचाता है।
NCERT में जैव विविधता के ह्रास के चार प्रमुख कारणों को ‘ईविल क्वार्टेट’ (Evil Quartet) कहा गया है—आवास विनाश एवं विखंडन, अत्यधिक दोहन, विदेशज प्रजातियों का आक्रमण तथा सह-विलुप्ति (Co-extinction)। सह-विलुप्ति की स्थिति तब उत्पन्न हो सकती है, जब किसी प्रजाति के विलुप्त होने से उस पर निर्भर दूसरी प्रजाति भी विलुप्त हो जाए। अंतर-सरकारी जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवा मंच (IPBES) के 2019 के वैश्विक आकलन में भूमि एवं समुद्र के उपयोग में परिवर्तन को जैव विविधता के ह्रास का सबसे प्रभावशाली वैश्विक प्रत्यक्ष कारक बताया गया है। प्राकृतिक आवासों का संरक्षण, जैविक गलियारों की स्थापना तथा क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों की पुनर्स्थापना इस ह्रास को सीमित करने के महत्वपूर्ण उपाय हैं।