Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन जल को जीवाणु मुक्त करने हेतु प्रयुक्त होता है/होते हैं ?
ओजोन
क्लोरीन डाइऑक्साइड
क्लोरैमीन
उपर्युक्त सभी
Correct Answer: D
Detailed Solution
जल कीटाणुशोधन (Water Disinfection) वह प्रक्रिया है, जिसमें जल में उपस्थित रोगजनक सूक्ष्मजीवों (Pathogenic Microorganisms), जैसे जीवाणु (Bacteria), विषाणु (Viruses) और कुछ प्रोटोजोआ (Protozoa) को नष्ट या निष्क्रिय किया जाता है। जल को कीटाणुरहित करने के लिए ओजोन (O₃), क्लोरीन डाइऑक्साइड (ClO₂) और क्लोरैमीन (Chloramine) तीनों का उपयोग किया जाता है। ये रासायनिक कीटाणुनाशक (Chemical Disinfectants) हैं, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली, प्रभावशीलता और जल में बने रहने की क्षमता अलग-अलग होती है।
ओजोन (Ozone—O₃) एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent) है, जो सूक्ष्मजीवों की कोशिका झिल्ली, प्रोटीन और अन्य आवश्यक जैविक संरचनाओं को क्षतिग्रस्त करके उन्हें निष्क्रिय करता है। इसका उपयोग जल उपचार संयंत्रों (Water Treatment Plants) में प्राथमिक कीटाणुशोधन (Primary Disinfection) के लिए किया जाता है। ओजोन अनेक जीवाणुओं, विषाणुओं और कुछ प्रोटोजोआ के विरुद्ध प्रभावी है। हालाँकि यह जल में लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहता, इसलिए पाइपलाइनों में पुनः संदूषण रोकने के लिए किसी अन्य अवशिष्ट कीटाणुनाशक (Residual Disinfectant) की आवश्यकता होती है।
क्लोरीन डाइऑक्साइड (Chlorine Dioxide—ClO₂) भी एक प्रभावी ऑक्सीकारक है, जिसका उपयोग पेयजल में जीवाणुओं, विषाणुओं और कुछ प्रोटोजोआ को निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है। यह सूक्ष्मजीवों के प्रोटीन और अन्य कोशिकीय घटकों का ऑक्सीकरण करके उनकी कार्यप्रणाली बाधित करता है। सामान्य क्लोरीन की तुलना में इसका एक लाभ यह है कि इससे ट्राइहैलोमीथेन (Trihalomethanes—THMs) बनने की प्रवृत्ति कम होती है। हालाँकि इसके उपयोग से क्लोराइट (Chlorite) और क्लोरेट (Chlorate) जैसे उपोत्पाद बन सकते हैं, जिनकी मात्रा नियंत्रित रखना आवश्यक है।
क्लोरैमीन (Chloramine) क्लोरीन और अमोनिया की अभिक्रिया से बनने वाले यौगिकों का समूह है। पेयजल उपचार में मुख्यतः मोनोक्लोरैमीन (Monochloramine—NH₂Cl) का उपयोग किया जाता है। इसकी कीटाणुनाशक क्रिया मुक्त क्लोरीन (Free Chlorine) की अपेक्षा धीमी होती है, लेकिन यह जल में अधिक समय तक सक्रिय रहता है। इसलिए इसका उपयोग मुख्यतः द्वितीयक कीटाणुशोधन (Secondary Disinfection) में किया जाता है, ताकि उपचार संयंत्र से उपभोक्ताओं तक जल पहुँचने के दौरान सूक्ष्मजीवों की वृद्धि नियंत्रित रहे। जल कीटाणुशोधन की प्रभावशीलता रसायन की सांद्रता, संपर्क अवधि, pH तथा जल की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।