Previous Year Question
निम्न में से कौन प्रवाल विरंजन में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक है ?
प्रवाल शैलों का खनन
प्रवाल रोगों का फैलना
सागरीय जल में अवसादों का जमाव
वैश्विक उष्मन
Correct Answer: D
Detailed Solution
प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) वह प्रक्रिया है, जिसमें प्रवाल (Corals) पर्यावरणीय तनाव के कारण अपने ऊतकों में रहने वाले सहजीवी शैवाल (Symbiotic Algae) को खो देते हैं, जिससे उनका रंग सफेद या अत्यधिक फीका पड़ जाता है। प्रवाल वास्तव में निडेरिया संघ (Phylum Cnidaria) के समुद्री जीव हैं, जिनके ऊतकों में जूजैंथेली (Zooxanthellae) नामक प्रकाश संश्लेषी शैवाल रहते हैं। ये शैवाल प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा प्रवालों को ऊर्जा प्रदान करते हैं और उनके रंग में भी योगदान देते हैं। वैश्विक उष्मन (Global Warming) के कारण समुद्री जल के तापमान में वृद्धि व्यापक स्तर पर प्रवाल विरंजन का प्रमुख कारण है।
सामान्यतः उष्णकटिबंधीय प्रवाल सीमित तापमान सीमा में विकसित होते हैं। समुद्री जल का तापमान स्थानीय ग्रीष्मकालीन सामान्य अधिकतम तापमान से लगभग 1–2°C अधिक होने और यह स्थिति कुछ समय तक बनी रहने पर प्रवालों में तापीय तनाव (Thermal Stress) उत्पन्न हो सकता है। इससे प्रवाल और सहजीवी शैवाल के बीच प्रकाश संश्लेषण एवं पोषक आदान-प्रदान की प्रक्रिया प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप प्रवाल शैवालों को बाहर निकाल सकते हैं या उनके प्रकाश संश्लेषी वर्णक नष्ट हो सकते हैं। शैवालों के कम होने पर प्रवालों के ऊतकों के नीचे स्थित सफेद कैल्शियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate—CaCO₃) का कंकाल दिखाई देने लगता है।
प्रवाल विरंजन का अर्थ प्रवालों की तत्काल मृत्यु नहीं है। यदि समुद्री तापमान सामान्य हो जाए और पर्यावरणीय तनाव कम हो जाए, तो प्रवाल पुनः सहजीवी शैवाल प्राप्त करके स्वस्थ हो सकते हैं। लेकिन लंबे समय तक उच्च तापमान बने रहने या बार-बार विरंजन होने से ऊर्जा की कमी, वृद्धि और प्रजनन क्षमता में गिरावट तथा रोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है। गंभीर परिस्थितियों में प्रवालों की मृत्यु होने से प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) पर निर्भर मछलियों और अन्य समुद्री जीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं।
प्रवाल शैलों का खनन (Coral Mining), प्रवाल रोग (Coral Diseases) और अवसादों का जमाव (Sedimentation) भी प्रवाल पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाते हैं। खनन से प्रवाल भित्तियों को प्रत्यक्ष भौतिक क्षति होती है, जबकि अवसादों के जमाव से सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता घट सकती है और प्रवालों की सतह ढक सकती है। रोग भी प्रवालों की मृत्यु या ऊतकों के क्षरण का कारण बन सकते हैं। हालाँकि इनमें से कुछ स्थानीय तनाव विरंजन उत्पन्न कर सकते हैं, लेकिन व्यापक एवं सामूहिक प्रवाल विरंजन (Mass Coral Bleaching) का प्रमुख कारक समुद्री तापमान में असामान्य वृद्धि है। भारत में लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, मन्नार की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी प्रमुख प्रवाल भित्ति क्षेत्र हैं।