JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2015

Previous Year Question

निम्नलिखित में से कौन एक पारिस्थितिक तंत्र की जैव विविधता की बढ़ोत्तरी के लिए उत्तरदायी नहीं है ?

A.

पारिस्थितिक तंत्र की उत्पादकता

B.

मध्य-व्यवधान

C.

पारिस्थितिक तंत्र की आयु

D.

पोषण स्तरों की कम संख्या

Correct Answer: D

Detailed Solution

जैव विविधता (Biodiversity) किसी पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) में उपस्थित जीवों की आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिक विविधता को दर्शाती है। इसकी वृद्धि पारिस्थितिक तंत्र की उत्पादकता (Productivity), संसाधनों की उपलब्धता, आवासीय विविधता (Habitat Heterogeneity), पर्यावरणीय व्यवधान और पारिस्थितिक उत्तराधिकार (Ecological Succession) जैसी प्रक्रियाओं से प्रभावित होती है। पोषण स्तरों (Trophic Levels) की कम संख्या अपने आप में जैव विविधता बढ़ाने वाला कारक नहीं है। विभिन्न पोषण स्तरों पर उत्पादकों, शाकाहारियों, मांसाहारियों और अपघटकों की उपस्थिति पारिस्थितिक तंत्र में जटिल खाद्य संबंधों तथा ऊर्जा प्रवाह को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पारिस्थितिक तंत्र की उत्पादकता (Ecosystem Productivity) एक निश्चित समय में प्रति इकाई क्षेत्र या आयतन पर उत्पन्न जैवभार (Biomass) अथवा संचित ऊर्जा की दर को दर्शाती है। हरे पौधे और शैवाल प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के माध्यम से सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं, जिसे प्राथमिक उत्पादकता (Primary Productivity) का आधार माना जाता है। अधिक उत्पादकता की परिस्थितियों में भोजन, ऊर्जा और अन्य संसाधनों की उपलब्धता बढ़ने से अधिक प्रजातियों के सह-अस्तित्व (Species Coexistence) की संभावना बढ़ सकती है। हालाँकि उत्पादकता और जैव विविधता के बीच संबंध सदैव रैखिक (Linear) नहीं होता। अत्यधिक उत्पादकता की स्थिति में कुछ प्रतिस्पर्धी प्रजातियों का प्रभुत्व बढ़ने से अन्य प्रजातियों की संख्या घट भी सकती है।

मध्यवर्ती व्यवधान परिकल्पना (Intermediate Disturbance Hypothesis—IDH) के अनुसार, पारिस्थितिक तंत्र में मध्यम तीव्रता या आवृत्ति वाले व्यवधान कुछ परिस्थितियों में प्रजातीय विविधता (Species Diversity) को बढ़ावा दे सकते हैं। इस परिकल्पना को जोसेफ कॉनेल (Joseph Connell) ने 1978 में विशेष रूप से पारिस्थितिक समुदायों की विविधता समझाने के लिए प्रस्तुत किया था। अत्यंत कम व्यवधान की स्थिति में शक्तिशाली प्रतिस्पर्धी प्रजातियाँ अन्य प्रजातियों को विस्थापित कर सकती हैं, जबकि अत्यधिक व्यवधान से अनेक संवेदनशील प्रजातियाँ नष्ट हो सकती हैं। मध्यवर्ती व्यवधान के दौरान विभिन्न प्रतिस्पर्धात्मक क्षमताओं वाली प्रजातियों के सह-अस्तित्व की संभावना बन सकती है। हालाँकि आधुनिक पारिस्थितिक अनुसंधानों के अनुसार यह परिकल्पना सभी पारिस्थितिक तंत्रों पर समान रूप से लागू नहीं होती।

पारिस्थितिक तंत्र की आयु (Ecosystem Age) और पारिस्थितिक उत्तराधिकार (Ecological Succession) भी जैव विविधता को प्रभावित करते हैं। किसी नए या व्यवधान से प्रभावित आवास में प्रारंभिक अवस्था में अग्रणी प्रजातियाँ (Pioneer Species) स्थापित होती हैं। समय के साथ मिट्टी का विकास, जैविक पदार्थों का संचय, वनस्पति संरचना की जटिलता और सूक्ष्म आवासों (Microhabitats) की विविधता बढ़ सकती है, जिससे नई प्रजातियों को स्थापित होने के अवसर मिलते हैं। इसके विपरीत, पोषण स्तरों की कम संख्या (Fewer Trophic Levels) जैव विविधता वृद्धि का स्वतंत्र कारक नहीं है। पोषण स्तर खाद्य शृंखला (Food Chain) में जीवों की भोजन संबंधी स्थिति को दर्शाते हैं, जबकि खाद्य जाल (Food Web) विभिन्न प्रजातियों के बीच अनेक भोजन संबंधों को जोड़ता है। पोषण स्तरों की संख्या मात्र से किसी पारिस्थितिक तंत्र की कुल प्रजातीय विविधता निर्धारित नहीं की जा सकती।

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