JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2014

Previous Year Question

सूर्य से आने वाला हानिकारक पराबैंगनी विकिरण कारण हो सकता है-

A.

यकृत कैंसर का

B.

मस्तिष्क कैंसर का

C.

मुखीय कैंसर का

D.

त्वचीय कैंसर का

Correct Answer: D

Detailed Solution

सूर्य से आने वाला पराबैंगनी विकिरण (Ultraviolet Radiation—UV) त्वचीय कैंसर (Skin Cancer) के प्रमुख पर्यावरणीय कारणों में से एक है। यह विद्युतचुम्बकीय विकिरण (Electromagnetic Radiation) का ऐसा भाग है, जिसकी तरंगदैर्ध्य दृश्य प्रकाश से कम होती है। पराबैंगनी विकिरण के अत्यधिक संपर्क से त्वचा की कोशिकाओं के डीएनए (Deoxyribonucleic Acid—DNA) को क्षति पहुँच सकती है। यदि कोशिकाओं की डीएनए मरम्मत प्रणाली (DNA Repair Mechanism) इस क्षति को पूरी तरह ठीक नहीं कर पाती, तो आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Genetic Mutations) विकसित हो सकते हैं। ऐसे उत्परिवर्तन कोशिका विभाजन के सामान्य नियंत्रण को प्रभावित करके कैंसर के विकास में योगदान देते हैं।

पराबैंगनी विकिरण को तरंगदैर्ध्य के आधार पर तीन श्रेणियों—UV-A (315–400 nm), UV-B (280–315 nm) और UV-C (100–280 nm) में विभाजित किया जाता है। UV-A त्वचा की अपेक्षाकृत गहरी परतों तक पहुँच सकता है तथा ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative Stress) उत्पन्न करके डीएनए को अप्रत्यक्ष क्षति पहुँचा सकता है। UV-B मुख्यतः त्वचा की बाहरी परत (Epidermis) को प्रभावित करता है और सनबर्न (Sunburn) तथा प्रत्यक्ष डीएनए क्षति का प्रमुख कारण है। UV-C सबसे अधिक ऊर्जावान होता है, लेकिन सूर्य से आने वाला UV-C वायुमंडल में अवशोषित हो जाता है और सामान्यतः पृथ्वी की सतह तक नहीं पहुँचता।

पराबैंगनी विकिरण के कारण होने वाले प्रमुख त्वचीय कैंसरों में बेसल सेल कार्सिनोमा (Basal Cell Carcinoma—BCC), स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous Cell Carcinoma—SCC) और मेलेनोमा (Melanoma) शामिल हैं। BCC सामान्यतः त्वचा की बेसल कोशिकाओं से उत्पन्न होता है और अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ता है। SCC त्वचा की स्क्वैमस कोशिकाओं से विकसित होता है, जबकि मेलेनोमा मेलेनिन (Melanin) बनाने वाली मेलानोसाइट कोशिकाओं (Melanocytes) से उत्पन्न होता है। मेलेनोमा अधिक आक्रामक हो सकता है तथा शरीर के अन्य भागों में फैलने की क्षमता रखता है। लंबे समय तक सूर्य के संपर्क में रहना, बार-बार सनबर्न होना और अत्यधिक UV विकिरण के संपर्क में आना त्वचीय कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।

पृथ्वी के समतापमंडल (Stratosphere) में स्थित ओजोन परत (Ozone Layer) सूर्य के अधिकांश UV-B तथा लगभग संपूर्ण UV-C विकिरण को अवशोषित करके जीवों की सुरक्षा करती है। ओजोन परत का क्षरण होने पर पृथ्वी की सतह तक पहुँचने वाले हानिकारक UV विकिरण की मात्रा बढ़ सकती है। पराबैंगनी विकिरण से त्वचीय कैंसर के अतिरिक्त समय से पहले त्वचा का वृद्ध होना (Premature Skin Aging), आँखों में मोतियाबिंद (Cataract) और प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव भी हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, UV Index 3 या उससे अधिक होने पर सूर्य से सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिए, जिनमें छाया का उपयोग, शरीर को ढकने वाले कपड़े, टोपी, धूप के चश्मे तथा उपयुक्त सनस्क्रीन शामिल हैं।

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