JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2014

Previous Year Question

मीथेन गैस उत्पादन करने वाला क्षेत्र है :

A.

गेहूँ का खेत

B.

धान का खेत

C.

कपास का खेत

D.

मूँगफली का खेत

Correct Answer: B

Detailed Solution

धान के खेत (Paddy Fields) मीथेन (Methane—CH₄) गैस के महत्वपूर्ण कृषि-आधारित उत्सर्जन स्रोतों में शामिल हैं। धान की पारंपरिक खेती में खेत लंबे समय तक जलमग्न (Waterlogged) रहते हैं, जिससे मिट्टी के भीतर ऑक्सीजन की उपलब्धता कम हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों में अवायवीय सूक्ष्मजीव (Anaerobic Microorganisms) कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करके मीथेन गैस उत्पन्न करते हैं। मीथेन एक शक्तिशाली हरित गृह गैस (Greenhouse Gas) है, जो वायुमंडल में ऊष्मा को रोककर वैश्विक तापन (Global Warming) में योगदान देती है।

मीथेन गैस बनने की जैविक प्रक्रिया को मीथेनजनन (Methanogenesis) कहा जाता है। यह प्रक्रिया मुख्यतः मीथेन उत्पादक आर्किया (Methanogenic Archaea) द्वारा ऑक्सीजन रहित परिस्थितियों में होती है। धान के खेतों में उपस्थित फसल अवशेष (Crop Residues), जड़ों से निकलने वाले कार्बनिक पदार्थ (Root Exudates) तथा अन्य जैविक पदार्थ इन सूक्ष्मजीवों को आवश्यक कार्बन उपलब्ध कराते हैं। ये सूक्ष्मजीव कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और हाइड्रोजन (H₂) अथवा एसीटेट (Acetate) जैसे पदार्थों का उपयोग करके मीथेन का निर्माण करते हैं। इस प्रकार जलमग्न मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों का अवायवीय अपघटन मीथेन उत्सर्जन का प्रमुख कारण है।

धान के खेतों में उत्पन्न मीथेन वायुमंडल तक मुख्यतः धान के पौधों की वायु ऊतक प्रणाली (Aerenchyma Tissue) के माध्यम से पहुँचती है। इसके अतिरिक्त कुछ मीथेन पानी में घुलकर विसरण (Diffusion) द्वारा तथा गैस के बुलबुलों (Ebullition) के रूप में भी बाहर निकलती है। उत्सर्जन की मात्रा मिट्टी के तापमान, जलभराव की अवधि, कार्बनिक पदार्थों की उपलब्धता और कृषि प्रबंधन पर निर्भर करती है। मीथेन का उत्सर्जन कम करने के लिए वैकल्पिक गीलापन एवं सुखाना (Alternate Wetting and Drying—AWD) तकनीक अपनाई जाती है, जिसमें खेत को लगातार जलमग्न रखने के बजाय नियंत्रित अंतराल पर सुखाया और पुनः सिंचित किया जाता है।

अन्य विकल्पों में गेहूँ (Wheat), कपास (Cotton) और मूँगफली (Groundnut) की खेती सामान्यतः ऐसी मिट्टी में की जाती है, जहाँ पर्याप्त वायु संचार और जल निकास बना रहता है। इन फसलों के खेतों में सामान्य परिस्थितियों में धान के जलमग्न खेतों जैसी व्यापक अवायवीय परिस्थितियाँ विकसित नहीं होतीं। इसलिए ये खेत मीथेन के उतने प्रमुख स्रोत नहीं हैं। हालाँकि जलभराव होने पर अन्य फसलों की मिट्टी से भी मीथेन का उत्सर्जन संभव है। धान की खेती में मीथेन उत्पादन का मुख्य संबंध फसल के बजाय जलमग्न मिट्टी की ऑक्सीजन रहित परिस्थितियों और सूक्ष्मजीवी गतिविधियों से है।

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