Previous Year Question
पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए निम्नांकित गैसों में से किसे प्रयोग में लाया जाता है ?
सल्फर डाइऑक्साइड
क्लोरीन
फ्लोरीन
कार्बन डाइऑक्साइड
Correct Answer: B
Detailed Solution
क्लोरीन (Chlorine—Cl₂) एक प्रभावी रासायनिक कीटाणुनाशक (Chemical Disinfectant) गैस है, जिसका उपयोग पीने के पानी को रोगजनक सूक्ष्मजीवों से मुक्त करने के लिए किया जाता है। जल शुद्धिकरण की इस प्रक्रिया को क्लोरीनीकरण (Chlorination) कहा जाता है। क्लोरीन जल में उपस्थित अनेक हानिकारक बैक्टीरिया (Bacteria) और विषाणुओं (Viruses) को निष्क्रिय करके जलजनित रोगों (Waterborne Diseases) के प्रसार को रोकने में सहायता करती है। इसका उपयोग नगरपालिकाओं के जल उपचार संयंत्रों (Water Treatment Plants) और सार्वजनिक जलापूर्ति प्रणालियों में व्यापक रूप से किया जाता है।
जब क्लोरीन गैस जल में मिलाई जाती है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके हाइपोक्लोरस अम्ल (Hypochlorous Acid—HOCl) और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Hydrochloric Acid—HCl) बनाती है। हाइपोक्लोरस अम्ल एक प्रभावी कीटाणुनाशक है, जो सूक्ष्मजीवों की आवश्यक कोशिकीय संरचनाओं और जैविक अणुओं को क्षतिग्रस्त करके उन्हें निष्क्रिय करता है। हाइपोक्लोरस अम्ल का एक भाग हाइपोक्लोराइट आयन (Hypochlorite Ion—OCl⁻) में परिवर्तित हो जाता है। इन दोनों का अनुपात जल के pH पर निर्भर करता है और सामान्यतः HOCl की कीटाणुनाशक क्षमता OCl⁻ की तुलना में अधिक होती है।
पेयजल उपचार में सामान्यतः स्कंदन (Coagulation), ऊर्णन (Flocculation), अवसादन (Sedimentation), निस्पंदन (Filtration) और कीटाणुशोधन (Disinfection) जैसी प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं। क्लोरीनीकरण मुख्यतः कीटाणुशोधन के लिए किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रभावी क्लोरीनीकरण के लिए pH 8 से कम होने पर कम से कम 30 मिनट के संपर्क समय के बाद मुक्त अवशिष्ट क्लोरीन (Free Residual Chlorine) की सांद्रता न्यूनतम 0.5 mg/L होनी चाहिए। वितरण के अंतिम बिंदु पर न्यूनतम 0.2 mg/L अवशिष्ट क्लोरीन बनाए रखने की अनुशंसा की जाती है। इसकी उपस्थिति पाइपलाइन में पुनः होने वाले सूक्ष्मजीवी संदूषण से सुरक्षा प्रदान करती है।
अन्य विकल्पों में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) का उपयोग कुछ जल उपचार प्रक्रियाओं में अतिरिक्त क्लोरीन हटाने अर्थात डीक्लोरीनीकरण (Dechlorination) के लिए किया जाता है। फ्लोरीन (F₂) अत्यधिक अभिक्रियाशील और विषैली गैस है, जिसका उपयोग सामान्य पेयजल कीटाणुशोधन में नहीं किया जाता; इसे दंत स्वास्थ्य के लिए नियंत्रित मात्रा में प्रयुक्त फ्लोराइड (Fluoride) से अलग समझना चाहिए। कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उपयोग कुछ जल उपचार प्रक्रियाओं में pH और क्षारीयता (Alkalinity) के समायोजन के लिए किया जाता है, न कि प्रमुख कीटाणुनाशक के रूप में। क्लोरीन अनेक रोगजनकों के विरुद्ध प्रभावी है, लेकिन Cryptosporidium जैसे कुछ प्रतिरोधी परजीवियों के विरुद्ध इसकी प्रभावशीलता सीमित होती है।