Previous Year Question
अपने प्रदूषकों के कारण निम्न में से कौन सी नदी ‘जैविक मरुस्थल’ कहलाती है ?
यमुना
पेरियार
दामोदर
महानदी
Correct Answer: C
Detailed Solution
दामोदर नदी (Damodar River) भारत की उन नदियों में शामिल है, जिनके कुछ हिस्से अत्यधिक औद्योगिक और खनन प्रदूषण से प्रभावित रहे हैं। प्रदूषण के कारण जलीय जीवों की संख्या और जैव विविधता में गंभीर कमी आने के संदर्भ में इसे ‘जैविक मरुस्थल’ (Biological Desert) कहा गया है। यह नदी मुख्यतः झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों से होकर बहती है। इसका उद्गम झारखंड की छोटानागपुर पठारी क्षेत्र की पलामू पहाड़ियों में होता है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में बराकर (Barakar), कोनार (Konar) और बोकारो (Bokaro) शामिल हैं।
दामोदर नदी घाटी (Damodar Valley) कोयले और अन्य खनिज संसाधनों से समृद्ध है। इस क्षेत्र में झरिया (Jharia), बोकारो (Bokaro) और रानीगंज (Raniganj) जैसे महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्र तथा इस्पात उद्योग, ताप विद्युत संयंत्र (Thermal Power Plants) और कोयला धुलाई संयंत्र (Coal Washeries) स्थित हैं। इन गतिविधियों से निकलने वाले खनन अपशिष्ट (Mining Waste), औद्योगिक बहिःस्राव (Industrial Effluents), कोयले के महीन कण और राख नदी के जल को प्रदूषित कर सकते हैं। विशेष रूप से दामोदर नदी का गिरिडीह से दुर्गापुर के बीच का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से गंभीर औद्योगिक प्रदूषण के लिए जाना जाता रहा है।
जैविक मरुस्थल (Biological Desert) शब्द का उपयोग ऐसी जल-पारिस्थितिकीय स्थिति को दर्शाने के लिए किया जाता है, जहाँ अत्यधिक प्रदूषण के कारण जलीय जीवों की संख्या और विविधता बहुत कम हो जाती है। नदी में कार्बनिक अपशिष्ट बढ़ने से जैव रासायनिक ऑक्सीजन माँग (Biochemical Oxygen Demand—BOD) बढ़ सकती है, जिससे घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen—DO) की उपलब्धता घटती है। इसके अतिरिक्त भारी धातुएँ (Heavy Metals), विषैले रसायन तथा निलंबित ठोस पदार्थ (Suspended Solids) मछलियों और अन्य जलीय जीवों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। यह शब्द नदी के प्रत्येक हिस्से में जलीय जीवन के पूर्ण अभाव को अनिवार्य रूप से नहीं दर्शाता।
दामोदर नदी को ऐतिहासिक रूप से ‘बंगाल का शोक’ (Sorrow of Bengal) भी कहा जाता था, क्योंकि इसकी विनाशकारी बाढ़ से पश्चिम बंगाल के निचले मैदानी क्षेत्र प्रभावित होते थे। बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और विद्युत उत्पादन के लिए 1948 में दामोदर घाटी निगम (Damodar Valley Corporation—DVC) की स्थापना की गई। तिलैया, कोनार, मैथन और पंचेत इसके प्रमुख बाँधों में शामिल हैं। दामोदर नदी की प्रदूषण समस्या का समाधान औद्योगिक अपशिष्ट उपचार, खनन अपशिष्ट प्रबंधन और जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी से जुड़ा है।