JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ENVIRONMENT · 2012

Previous Year Question

निम्नलिखित पदार्थों में से कौन से ओजोन रिक्तिकारक हैं ?

नीचे दिये कूट से सही उत्तर चुनिए :

  1. क्लोरोफ्लुओरोकार्बन्स

  2. हैलान्स

  3. कार्बनटेट्राक्लोराइड

कूट :

A.

केवल 1

B.

केवल 1 एवं 2

C.

केवल 2 एवं 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: D

Detailed Solution

ओजोन रिक्तिकारक पदार्थ (Ozone-Depleting Substances—ODS) वे रासायनिक यौगिक हैं, जो समतापमंडल (Stratosphere) में उपस्थित ओजोन परत (Ozone Layer) के क्षरण का कारण बनते हैं। ओजोन परत पृथ्वी की सतह से लगभग 15–35 किलोमीटर की ऊँचाई पर ओजोन की अपेक्षाकृत अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र है। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet Radiation), विशेषकर UV-B के अधिकांश भाग को अवशोषित करती है। क्लोरोफ्लुओरो कार्बन्स (CFCs), हैलॉन्स (Halons) और कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl₄) तीनों ओजोन रिक्तिकारक पदार्थ हैं।

क्लोरोफ्लुओरो कार्बन्स (Chlorofluorocarbons—CFCs) कार्बन, क्लोरीन और फ्लोरीन से बने रासायनिक यौगिक हैं। इनका उपयोग पूर्व में रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, एयरोसोल प्रणोदक (Aerosol Propellants) तथा फोम निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता था। ये क्षोभमंडल (Troposphere) में अपेक्षाकृत स्थिर रहते हैं और समतापमंडल तक पहुँच सकते हैं। वहाँ पराबैंगनी विकिरण के प्रभाव से इनके विघटन पर मुक्त क्लोरीन परमाणु ओजोन (O₃) के विघटन को उत्प्रेरित करते हैं। इस प्रक्रिया में एक क्लोरीन परमाणु हटाए जाने से पहले बड़ी संख्या में ओजोन अणुओं को नष्ट कर सकता है।

हैलॉन्स (Halons) मुख्यतः ब्रोमीन युक्त हैलोजनीकृत कार्बनिक यौगिक हैं, जिनका उपयोग विशेष रूप से अग्निशामक प्रणालियों (Fire Suppression Systems) में किया जाता रहा है। उदाहरण के लिए, Halon-1211 और Halon-1301 प्रमुख ओजोन रिक्तिकारक यौगिक हैं। समतापमंडल में इनके विघटन से मुक्त ब्रोमीन (Bromine) ओजोन के विनाश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्बन टेट्राक्लोराइड (Carbon Tetrachloride—CCl₄) कार्बन और क्लोरीन से बना एक रासायनिक यौगिक है, जिसका उपयोग पूर्व में औद्योगिक विलायक (Industrial Solvent) तथा विभिन्न रसायनों के निर्माण में किया जाता था। यह समतापमंडल में क्लोरीन का स्रोत बनकर ओजोन क्षरण में योगदान देता है।

ओजोन परत के संरक्षण के लिए 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol) अपनाया गया, जो 1989 में प्रभावी हुआ। इसके अंतर्गत ओजोन रिक्तिकारक पदार्थों के उत्पादन और उपभोग को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित किया गया। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के Annex A में CFCs और Halons, जबकि Annex B में Carbon Tetrachloride को नियंत्रित पदार्थों की सूची में शामिल किया गया है। ओजोन परत का क्षरण होने पर पृथ्वी की सतह तक अधिक UV-B विकिरण पहुँच सकता है, जिससे त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद तथा वनस्पतियों और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचने का जोखिम बढ़ता है।

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