Previous Year Question
धारणी विकास किसके उपयोग के सन्दर्भ में अन्तर-पीढ़ीगत संवेदनशीलता का विषय है?
प्राकृतिक संसाधन
भौतिक संसाधन
औद्योगिक संसाधन
सामाजिक संसाधन
Correct Answer: A
Detailed Solution
धारणीय विकास (Sustainable Development) एक ऐसी विकास प्रक्रिया है, जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते समय भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यह अवधारणा मुख्यतः प्राकृतिक संसाधनों (Natural Resources) के विवेकपूर्ण उपयोग और अंतर-पीढ़ीगत समानता (Intergenerational Equity) से संबंधित है। इसका उद्देश्य जल, वन, भूमि, खनिज और ऊर्जा जैसे संसाधनों का उपयोग इस प्रकार करना है कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी उनकी उपलब्धता बनी रहे।
धारणीय विकास की व्यापक रूप से स्वीकृत परिभाषा 1987 में विश्व पर्यावरण एवं विकास आयोग (World Commission on Environment and Development—WCED) की रिपोर्ट Our Common Future में प्रस्तुत की गई थी। इस आयोग की अध्यक्ष ग्रो हार्लेम ब्रुंटलैंड (Gro Harlem Brundtland) थीं, इसलिए इसे ब्रुंटलैंड आयोग (Brundtland Commission) भी कहा जाता है। इस अवधारणा के अनुसार विकास में वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की पीढ़ियों के हितों के बीच संतुलन आवश्यक है।
प्राकृतिक संसाधनों को सामान्यतः नवीकरणीय (Renewable) और अनवीकरणीय (Non-Renewable) संसाधनों में विभाजित किया जाता है। वन, जल और जैविक संसाधनों का पुनर्भरण या पुनर्जनन प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है, जबकि कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे अनवीकरणीय संसाधन मानव समय-सीमा में पुनः निर्मित नहीं हो सकते। इसलिए संसाधन दक्षता (Resource Efficiency), संरक्षण (Conservation), पुनर्चक्रण (Recycling) और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग धारणीय विकास के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
धारणीय विकास के तीन प्रमुख आयाम हैं—आर्थिक विकास (Economic Development), सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) और पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection)। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2015 में अपनाए गए सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals—SDGs) इन्हीं आयामों को एकीकृत करते हैं। इनमें लक्ष्य 12 उत्तरदायी उपभोग एवं उत्पादन तथा लक्ष्य 15 स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से संबंधित है।