Previous Year Question
नीचे दो कथन दिये गये हैं, एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A) : बीसवीं शताब्दी में निर्धनता एवं निर्धन व्यक्ति हमारी चिन्ता एवं कर्तव्य के विषय बने।
कारण (R) : रणनीतिक रूप से यहाँ लक्ष्य भेदन क्रियाओं का अभाव था जिसके फलस्वरूप इस मुद्दे को गति मिली।
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर का चयन कीजिये :
(A) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है
(A) सही है परन्तु (R) गलत है
(A) तथा (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
(A) गलत है परन्तु (R) सही है
Correct Answer: A
Detailed Solution
अभिकथन (A) सही है। बीसवीं शताब्दी के दौरान poverty को केवल व्यक्ति की निजी आर्थिक स्थिति के रूप में देखने के बजाय इसे धीरे-धीरे एक महत्वपूर्ण social, economic और public-policy issue के रूप में देखा जाने लगा।
Governments और international institutions ने poverty reduction को development policy, social welfare और public responsibility से जोड़ना शुरू किया।
कारण (R) भी प्रश्न के संदर्भ में सही है। लंबे समय तक poverty को दूर करने के लिए पर्याप्त रूप से targeted और व्यवस्थित interventions का अभाव रहा। इससे गरीबी की समस्या बनी रही और उसकी व्यापकता ने इसे अधिक गंभीर policy concern बना दिया।
बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में poverty eradication के लिए अधिक स्पष्ट और targeted approaches सामने आईं—जैसे social protection, employment programmes, basic services, education, health तथा poverty-specific development programmes।
बाद में poverty reduction international development agenda का भी प्रमुख भाग बना। आज SDG 1 — No Poverty का लक्ष्य सभी रूपों में poverty को समाप्त करना है।
इसलिए प्रश्न के logic में लक्ष्य-भेदी कार्रवाइयों की कमी ने poverty की समस्या को बढ़ने/बने रहने दिया, जिससे poverty और poor people सार्वजनिक चिंता एवं कर्तव्य का प्रमुख विषय बने।