Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए।
सूची-I (निबंधकार) | सूची-II (ग्रंथ) |
A. देवण भट्ट | 1. दान सागर |
B. हेमाद्रि | 2. पराशर माधव |
C. माधवाचार्य | 3. चतुर्वर्ग चिंतामणि |
D. बल्लाल सेन | 4. स्मृति चंद्रिका |
कूट:
A–2, B–4, C–1, D–3
A–1, B–4, C–2, D–3
A–3, B–2, C–1, D–4
A–4, B–3, C–2, D–1
Correct Answer: D
Detailed Solution
A. देवण भट्ट — स्मृति चंद्रिका (4)। देवण भट्ट (Devanna Bhatta) मध्यकालीन भारत के प्रमुख धर्मशास्त्रकार थे। उन्होंने स्मृति चंद्रिका (Smritichandrika) नामक संस्कृत ग्रंथ की रचना की। इसमें धर्मशास्त्र, सामाजिक आचरण, धार्मिक संस्कार, उत्तराधिकार, संपत्ति के विभाजन तथा न्यायिक व्यवहार से संबंधित नियमों का विवेचन किया गया है। यह ग्रंथ विशेष रूप से दक्षिण भारतीय धर्मशास्त्रीय परंपरा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
B. हेमाद्रि — चतुर्वर्ग चिंतामणि (3)। हेमाद्रि (Hemadri) 13वीं शताब्दी के यादव राजवंश से संबंधित प्रमुख विद्वान एवं प्रशासक थे। उन्होंने चतुर्वर्ग चिंतामणि (Chaturvarga Chintamani) की रचना की, जो धर्मशास्त्र का एक विस्तृत संस्कृत निबंध-ग्रंथ है। इसमें व्रत, दान, श्राद्ध, प्रायश्चित्त तथा धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित नियमों का वर्णन मिलता है। इसके प्रमुख खंडों में व्रतखंड, दानखंड और प्रायश्चित्तखंड शामिल हैं।
C. माधवाचार्य — पराशर माधव (2)। माधवाचार्य (Madhavacharya) से संबंधित पराशर माधव (Parashara Madhaviya) धर्मशास्त्र का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह मूलतः पराशर स्मृति पर माधव द्वारा लिखी गई विस्तृत टीका है। इसमें आचार, धार्मिक कर्तव्य, न्यायिक व्यवहार तथा प्रायश्चित्त संबंधी विषयों की व्याख्या की गई है। ग्रंथ के प्रमुख विभागों में आचारकांड, व्यवहारकांड और प्रायश्चित्तकांड सम्मिलित हैं।
D. बल्लाल सेन — दान सागर (1)। बल्लाल सेन (Ballala Sena) 12वीं शताब्दी में बंगाल के सेन राजवंश के प्रमुख शासक थे। उन्होंने दान सागर (Danasagara) नामक संस्कृत धर्मशास्त्रीय ग्रंथ की रचना की। इसमें विभिन्न प्रकार के दान, दान देने की धार्मिक विधियों तथा उनसे संबंधित नियमों का वर्णन मिलता है। बल्लाल सेन की एक अन्य प्रसिद्ध रचना अद्भुत सागर (Adbhutasagara) है, जो शकुन और अन्य असाधारण घटनाओं से संबंधित परंपराओं का विवेचन करती है।