Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
सूची-I (ग्रन्थ) | सूची-II (लेखक) |
A. रागमाला | 1. सोमनाथ |
B. रसकौमुदी | 2. वेंकटरमन |
C. रागविबोध | 3. पुण्डरीक विट्ठल |
D. चतुर्दण्डी प्रकाशिका | 4. श्रीकण्ठ |
कूट:
A–3, B–4, C–1, D–2
A–2, B–4, C–3, D–1
A–4, B–2, C–1, D–3
A–1, B–2, C–3, D–4
Correct Answer: A
Detailed Solution
A. रागमाला — पुण्डरीक विट्ठल (3)। पुण्डरीक विट्ठल (Pundarika Vitthala) 16वीं शताब्दी के प्रमुख भारतीय संगीतशास्त्री थे। उन्होंने 1576 ई. में रागमाला नामक ग्रंथ की रचना की थी। इसमें उत्तर भारतीय संगीत पद्धति के अंतर्गत रागों के वर्गीकरण तथा उनके संगीतात्मक स्वरूप का वर्णन किया गया है। उनके अन्य प्रमुख ग्रंथों में रागमंजरी, सद्रागचन्द्रोदय और नर्तननिर्णय शामिल हैं।
B. रसकौमुदी — श्रीकण्ठ (4)। श्रीकण्ठ (Srikantha) 16वीं शताब्दी के संगीतशास्त्री थे, जिन्होंने रसकौमुदी (Rasakaumudi) की रचना की। इस ग्रंथ में भारतीय संगीत के सैद्धांतिक पक्ष, रागों के वर्गीकरण तथा संगीत और रस के संबंध का विवेचन किया गया है। श्रीकण्ठ ने विभिन्न रागों को मेल (Mela) पद्धति के आधार पर व्यवस्थित करने का प्रयास किया था। यह ग्रंथ मध्यकालीन भारतीय संगीतशास्त्र के अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत है।
C. रागविबोध — सोमनाथ (1)। सोमनाथ (Somanatha) ने लगभग 1609 ई. में रागविबोध (Ragavibodha) की रचना की थी। संस्कृत भाषा में लिखित इस ग्रंथ में पाँच अध्याय और लगभग 470 श्लोक हैं। इसमें श्रुति, स्वर, वीणा, मेल तथा रागों के स्वरूप और वर्गीकरण का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय संगीत परंपराओं के ऐतिहासिक विकास को समझने में महत्वपूर्ण है।
D. चतुर्दण्डी प्रकाशिका — वेंकटमखी (2)। वेंकटमखी (Venkatamakhin) 17वीं शताब्दी के प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय संगीतशास्त्री थे। उन्होंने लगभग 1660 ई. में चतुर्दण्डी प्रकाशिका (Chaturdandi Prakashika) की रचना की थी। इस ग्रंथ में कर्नाटक संगीत के रागों के वर्गीकरण तथा 72 मेल पद्धति (72 Mela System) का सैद्धांतिक प्रतिपादन किया गया। यह पद्धति आगे चलकर कर्नाटक संगीत की मेलकर्ता राग प्रणाली के विकास का आधार बनी। प्रश्न की सूची में लेखक का नाम 'वेंकटरमन' दिया गया है, जबकि मान्य संगीतशास्त्रीय नाम वेंकटमखी है।