Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
सूची-I (व्यक्ति) | सूची-II (संबंधित क्षेत्र) |
A. एम. एस. स्वामीनाथन | 1. बैंकों पर सामाजिक नियंत्रण |
B. एल. के. झा | 2. दुग्ध उत्पादन |
C. वर्गीज कुरियन | 3. हरित क्रांति |
D. मोरारजी देसाई | 4. आर्थिक प्रशासन सुधार |
कूट:
A-1, B-2, C-4, D-3
A-2, B-3, C-4, D-1
A-3, B-4, C-2, D-1
A-4, B-1, C-3, D-2
Correct Answer: C
Detailed Solution
A. एम. एस. स्वामीनाथन — हरित क्रांति (3)। प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का जनक माना जाता है। उन्होंने 1960 के दशक में नॉर्मन बोरलॉग के सहयोग से गेहूँ की उच्च उपज देने वाली बौनी किस्मों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हरित क्रांति के अंतर्गत उन्नत बीजों, रासायनिक उर्वरकों, सिंचाई और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई। इसका प्रारंभिक प्रभाव विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिखाई दिया।
B. एल. के. झा — आर्थिक प्रशासन सुधार (4)। लक्ष्मी कांत झा (L. K. Jha) एक भारतीय अर्थशास्त्री और वरिष्ठ प्रशासक थे। उन्होंने 1967 से 1970 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में कार्य किया। वर्ष 1981 में गठित आर्थिक प्रशासन सुधार आयोग (Economic Administration Reforms Commission) की अध्यक्षता भी उन्होंने की। इस आयोग का उद्देश्य आर्थिक निर्णयों, सरकारी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार के उपाय सुझाना था।
C. वर्गीज कुरियन — दुग्ध उत्पादन (2)। वर्गीज कुरियन को भारत में श्वेत क्रांति (White Revolution) का जनक कहा जाता है। उन्होंने गुजरात के आनंद में विकसित सहकारी दुग्ध उत्पादन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा 1970 में ऑपरेशन फ्लड (Operation Flood) प्रारंभ किया गया। इसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाना, उत्पादकों को बाजारों से जोड़ना तथा ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों की आय में सुधार करना था।
D. मोरारजी देसाई — बैंकों पर सामाजिक नियंत्रण (1)। मोरारजी देसाई ने उपप्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री के रूप में 1967–68 के दौरान वाणिज्यिक बैंकों पर सामाजिक नियंत्रण (Social Control over Banks) की नीति को आगे बढ़ाया। इसका उद्देश्य बैंक ऋण को बड़े औद्योगिक घरानों तक सीमित रखने के बजाय कृषि, लघु उद्योग तथा अन्य प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों की ओर निर्देशित करना था। यह व्यवस्था 19 जुलाई, 1969 को 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों के राष्ट्रीयकरण से पहले लागू की गई थी। राष्ट्रीयकरण के समय मोरारजी देसाई वित्त मंत्री नहीं थे।