Previous Year Question
भारत में नियोजित विकास का विरोध किसने किया?
महात्मा गांधी
जवाहरलाल नेहरू
इंदिरा गांधी
राजीव गांधी
Correct Answer: A
Detailed Solution
महात्मा गांधी ने भारत में केंद्रीकृत नियोजित विकास (Centralised Planned Development) की अवधारणा का विरोध किया था। वे आर्थिक विकास के लिए राज्य के अत्यधिक नियंत्रण, बड़े उद्योगों पर निर्भरता तथा आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण के आलोचक थे। उनका मानना था कि इस प्रकार की विकास व्यवस्था से ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है तथा आर्थिक असमानता और बेरोजगारी बढ़ सकती है।
गांधीजी का आर्थिक दृष्टिकोण ग्राम स्वराज (Gram Swaraj) और विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था (Decentralised Economy) पर आधारित था। वे ग्रामोद्योग, कुटीर उद्योग, खादी, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और ग्रामीण आत्मनिर्भरता के समर्थक थे। उनका उद्देश्य उत्पादन और आर्थिक निर्णयों को स्थानीय समुदायों के निकट रखना था। इसलिए उनका विरोध आर्थिक विकास या प्रत्येक प्रकार के नियोजन से नहीं, बल्कि मुख्यतः केंद्रीकृत एवं बड़े उद्योगों पर आधारित विकास मॉडल से था।
वर्ष 1944 में श्रीमन्नारायण अग्रवाल ने गांधीवादी योजना (Gandhian Plan) प्रस्तुत की थी। इसमें कृषि, ग्रामीण उद्योगों और विकेंद्रीकृत आर्थिक संरचना को प्राथमिकता दी गई थी। इसके विपरीत जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 1938 में राष्ट्रीय योजना समिति (National Planning Committee) का गठन हुआ, जिसने औद्योगिकीकरण तथा आर्थिक विकास में राज्य की सक्रिय भूमिका का समर्थन किया।
स्वतंत्र भारत में 15 मार्च, 1950 को योजना आयोग की स्थापना हुई तथा प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951–1956) प्रारंभ की गई। जवाहरलाल नेहरू नियोजित विकास के प्रमुख समर्थक थे। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में भी पंचवर्षीय योजनाओं की व्यवस्था जारी रही। इस प्रकार गांधीजी का आर्थिक दृष्टिकोण भारत में अपनाए गए केंद्रीकृत नियोजन मॉडल से भिन्न था।