Previous Year Question
‘दि राइज एण्ड ग्रोथ ऑफ इकोनोमिक नेशनलिज्म इन इंडिया’ के लेखक थे
पार्थ सारथी गुप्त
एस. गोपाल
बी. आर. नंदा
बिपिन चन्द्र
Correct Answer: D
Detailed Solution
प्रसिद्ध इतिहासकार बिपिन चन्द्र ने The Rise and Growth of Economic Nationalism in India: Economic Policies of Indian National Leadership, 1880–1905 नामक पुस्तक लिखी थी। इसका प्रथम प्रकाशन 1966 में पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली द्वारा किया गया। यह पुस्तक औपनिवेशिक भारत में आर्थिक राष्ट्रवाद के उदय और विकास का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अध्ययन है।
इस पुस्तक में 1880 से 1905 के बीच भारतीय राष्ट्रीय नेतृत्व के आर्थिक विचारों का विश्लेषण किया गया है। इस अवधि में भारतीय राष्ट्रवादियों ने ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों, अत्यधिक भूमि राजस्व, विदेशी व्यापार की असमानताओं और भारतीय उद्योगों की समस्याओं का अध्ययन किया। उन्होंने तर्क दिया कि औपनिवेशिक आर्थिक व्यवस्था भारत के संसाधनों और आर्थिक विकास के लिए प्रतिकूल थी।
आर्थिक राष्ट्रवाद के विकास में दादाभाई नौरोजी, महादेव गोविन्द रानाडे और रोमेश चन्द्र दत्त जैसे विचारकों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। दादाभाई नौरोजी ने धन-निष्कासन सिद्धांत (Drain of Wealth Theory) के माध्यम से भारत से ब्रिटेन की ओर संपत्ति के हस्तांतरण की आलोचना की। रोमेश चन्द्र दत्त ने औपनिवेशिक भूमि राजस्व व्यवस्था और आर्थिक नीतियों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभावों का विश्लेषण किया।
बिपिन चन्द्र भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और आधुनिक भारतीय इतिहास के प्रमुख इतिहासकार थे। उनकी अन्य प्रसिद्ध पुस्तकों में India's Struggle for Independence और India Since Independence शामिल हैं, जिनके वे सह-लेखक भी थे। उनकी आर्थिक राष्ट्रवाद संबंधी पुस्तक यह समझने में महत्वपूर्ण है कि ब्रिटिश शासन की आर्थिक आलोचना किस प्रकार भारतीय राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन के विकास का आधार बनी।