Previous Year Question
भारत में पट्टेदारी सुधार के उपायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?
लगान का विनियमन
अवधि की सुरक्षा
पट्टेदारी पर स्वामित्व की घोषणा
नीचे दिए हुए कूटों में से सही उत्तर चुनिए :
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
भारत में पट्टेदारी सुधार (Tenancy Reforms) भूमि सुधार कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहे हैं। इनका उद्देश्य काश्तकारों (Tenants) को अत्यधिक लगान, मनमानी बेदखली और असुरक्षित भूमि अधिकारों से संरक्षण प्रदान करना था। स्वतंत्रता के बाद इन सुधारों के तीन प्रमुख उपाय निर्धारित किए गए—लगान का विनियमन, पट्टेदारी की अवधि की सुरक्षा तथा काश्तकारों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करना।
कथन 1 — लगान का विनियमन (सही)। इसका उद्देश्य भूस्वामियों द्वारा वसूले जाने वाले अत्यधिक लगान को नियंत्रित करना था। पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत सामान्यतः लगान को कुल कृषि उपज के 1/5 से 1/4 भाग तक सीमित रखने की सिफारिश की गई थी। इससे काश्तकारों को उनकी कृषि उपज का उचित हिस्सा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
कथन 2 — अवधि की सुरक्षा (सही)। इसका उद्देश्य काश्तकारों को भूस्वामियों द्वारा मनमाने ढंग से भूमि से बेदखल किए जाने से बचाना था। पट्टेदारी की सुरक्षा के अंतर्गत निर्धारित कानूनी परिस्थितियों को छोड़कर काश्तकारों को भूमि पर खेती जारी रखने का अधिकार देने की व्यवस्था की गई। इससे कृषि में दीर्घकालीन निवेश और उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती थीं।
कथन 3 — पट्टेदारी पर स्वामित्व की घोषणा (सही)। इसका उद्देश्य निर्धारित कानूनी शर्तों के अंतर्गत वास्तविक काश्तकारों को भूमि का स्वामित्व अधिकार प्रदान करना था। महाराष्ट्र और गुजरात में 1 अप्रैल, 1957 को संबंधित कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत पात्र काश्तकारों को भूमि का स्वामी माना गया। हालांकि, स्वामित्व हस्तांतरण की व्यवस्था और उसका क्रियान्वयन विभिन्न राज्यों के भूमि सुधार कानूनों के अनुसार अलग-अलग रहा।