JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

GENERAL KNOWLEDGE · 2014

Previous Year Question

अपनी फाँसी से पूर्व निम्नलिखित क्रान्तिकारियों में से एक ने पीने हेतु दिये गये दूध को अस्वीकार कर दिया और कहा,


“
अब मैं केवल अपनी माँ का दूध लूँगा।”

A.

राजगुरु

B.

अशफाकउल्ला

C.

रामप्रसाद बिस्मिल

D.

भगत सिंह

Correct Answer: C

Detailed Solution

यह कथन महान क्रान्तिकारी रामप्रसाद बिस्मिल से संबंधित है। वे हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के प्रमुख क्रान्तिकारियों में थे और काकोरी काण्ड, 1925 के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।

9 अगस्त 1925 को काकोरी के निकट सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन से धन प्राप्त करने की क्रान्तिकारी कार्रवाई की गई थी। ब्रिटिश सरकार ने इसके बाद व्यापक गिरफ्तारियाँ कीं और बिस्मिल सहित कई क्रान्तिकारियों पर मुकदमा चलाया।

रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खाँ, रोशन सिंह और राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को मृत्युदण्ड दिया गया।

बिस्मिल को 19 दिसम्बर 1927 को गोरखपुर जिला जेल में फाँसी दी गई। फाँसी से एक शाम पहले जब उन्हें दूध दिया गया तो उन्होंने उसे लेने से मना कर दिया और कहा—

“अब मैं केवल अपनी माँ का दूध लूँगा।”

यह कथन उनके अपनी माता मूलमती देवी के प्रति गहरे भावनात्मक संबंध और मातृभूमि के लिए बलिदान के भाव से जुड़ा हुआ माना जाता है।

यहाँ अशफाकउल्ला खाँ महत्वपूर्ण distractor हैं, क्योंकि उन्हें भी 19 दिसम्बर 1927 को काकोरी मामले में ही फाँसी दी गई थी, लेकिन फैजाबाद जेल में। प्रश्न में दिया गया दूध वाला कथन रामप्रसाद बिस्मिल से संबंधित है।

इसी प्रकार भगत सिंह और राजगुरु का संबंध अलग क्रान्तिकारी घटनाक्रम से था; उन्हें सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फाँसी दी गई।

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