Previous Year Question
बी. जी. तिलक के सजा के पश्चात् निम्नलिखित में से किसने दया की वकालत की थी और कहा था—
“संस्कृत के एक विद्वान के रूप में तिलक में मेरी दिलचस्पी है।”
रवीन्द्रनाथ टैगोर
मैक्स मूलर
बिपिनचन्द्र पाल
विलियम जोन्स
Correct Answer: B
Detailed Solution
यह प्रश्न बाल गंगाधर तिलक के 1897 के राजद्रोह मुकदमे से संबंधित है। इस मुकदमे में तिलक को दोषी ठहराकर 18 महीने के कारावास की सजा दी गई थी।
प्रसिद्ध जर्मन मूल के संस्कृत एवं प्राच्यविद्या विद्वान फ्रेडरिक मैक्स मूलर (Friedrich Max Müller) तिलक की विद्वत्ता से परिचित थे। तिलक केवल राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि संस्कृत, वेद और प्राचीन भारतीय इतिहास के गंभीर अध्येता भी थे।
विशेष रूप से तिलक की पुस्तक Orion, or Researches into the Antiquity of the Vedas ने यूरोपीय प्राच्यविदों का ध्यान आकर्षित किया था। इसी scholarly connection के कारण Max Müller की तिलक में विशेष रुचि थी।
तिलक की सजा के बाद Max Müller और Sir William Hunter सहित कई विद्वानों ने Queen Victoria के समक्ष दया की याचिका का समर्थन किया। ऐतिहासिक विवरणों में Max Müller को इस petition के प्रमुख प्रयासकर्ताओं में बताया गया है।
तिलक को अंततः 6 सितम्बर 1898 को कारावास से रिहा कर दिया गया। Max Müller के हस्तक्षेप और विद्वानों द्वारा की गई clemency appeal ने उनकी शीघ्र रिहाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसलिए प्रश्न में दिया गया कथन—
“संस्कृत के एक विद्वान के रूप में तिलक में मेरी दिलचस्पी है” → Max Müller
से संबंधित है।