JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

GENERAL SCIENCE · 2012

Previous Year Question

होमी भाभा पुरस्कार किस क्षेत्र में विशेष योगदान के लिये दिया जाता है ?

A.

सैद्धान्तिक भौतिकी

B.

नाभिकीय ऊर्जा

C.

लेसर भौतिकी

D.

अन्तरिक्ष अनुसन्धान

Correct Answer: B

Detailed Solution

होमी भाभा पुरस्कार (Homi Bhabha Award) इस प्रश्न के संदर्भ में नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) के क्षेत्र में विशेष योगदान से संबंधित है। यह पुरस्कार भारत के परमाणु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास में डॉ. होमी जहांगीर भाभा के योगदान से जुड़ा है। वे भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के प्रमुख संस्थापक माने जाते हैं।

डॉ. होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhabha) एक भारतीय नाभिकीय भौतिकविद् (Nuclear Physicist) थे। उन्होंने कॉस्मिक किरणों (Cosmic Rays), इलेक्ट्रॉन-पॉजिट्रॉन प्रकीर्णन (Electron-Positron Scattering) तथा उच्च ऊर्जा भौतिकी (High-Energy Physics) के अध्ययन में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इलेक्ट्रॉन-पॉजिट्रॉन प्रकीर्णन से संबंधित उनके कार्य को भाभा प्रकीर्णन (Bhabha Scattering) के नाम से जाना जाता है।

भारत में परमाणु अनुसंधान के विकास में उनकी प्रमुख भूमिका:

  1. 1945: मुंबई में टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (Tata Institute of Fundamental Research – TIFR) की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई।

  1. 1948: परमाणु ऊर्जा आयोग (Atomic Energy Commission – AEC) के गठन के बाद इसके प्रथम अध्यक्ष बने।

  1. 1954: ट्रॉम्बे में परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान (Atomic Energy Establishment, Trombay – AEET) की स्थापना की।

  1. 1967: उनके निधन के बाद AEET का नाम बदलकर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (Bhabha Atomic Research Centre – BARC) रखा गया।

नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) परमाणु के नाभिक में निहित ऊर्जा है, जिसे नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) अथवा नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से मुक्त किया जा सकता है।

वर्तमान वाणिज्यिक परमाणु विद्युत संयंत्रों में मुख्यतः नाभिकीय विखंडन का उपयोग होता है। इसमें यूरेनियम-235 जैसे भारी परमाणु नाभिक के विखंडन से ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसका उपयोग भाप बनाने और टरबाइन चलाकर विद्युत उत्पादन करने में किया जाता है।

डॉ. भाभा ने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में देश के यूरेनियम एवं थोरियम संसाधनों के दीर्घकालीन उपयोग पर बल दिया। भारत के त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (Three-Stage Nuclear Power Programme) की अवधारणा भी उनके दृष्टिकोण से संबंधित है।

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