Previous Year Question
निम्नलिखित पर विचार कीजिए तथा उन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
काम के बदले अनाज कार्यक्रम
सामुदायिक विकास कार्यक्रम
स्व रोजगार के लिए ग्रामीण युवाओं का प्रशिक्षण (ट्राइसेम)
सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
4, 2, 3, 1
2, 4, 1, 3
2, 4, 3, 1
4, 2, 1, 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
भारत में ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, सूखा प्रभावित क्षेत्रों के विकास तथा स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम प्रारंभ किए गए। इन कार्यक्रमों का सही कालक्रम सामुदायिक विकास कार्यक्रम (1952) → सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम (1973–74) → काम के बदले अनाज कार्यक्रम (1977) → ट्राइसेम (1979) है।
1. सामुदायिक विकास कार्यक्रम (Community Development Programme – CDP), 1952: इस कार्यक्रम की शुरुआत 2 अक्टूबर, 1952 को प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951–56) के दौरान हुई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी से कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और ग्रामीण आधारभूत संरचना का विस्तार करना था। प्रारंभ में इसे 55 सामुदायिक विकास परियोजनाओं के माध्यम से लागू किया गया था।
2. सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम (Drought Prone Areas Programme – DPAP), 1973–74: इस कार्यक्रम का उद्देश्य बार-बार सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, कृषि उत्पादकता में सुधार तथा ग्रामीण आजीविका को अधिक स्थिर बनाना था। इसके अंतर्गत जल संरक्षण, मृदा संरक्षण (Soil Conservation), वनीकरण (Afforestation), चारागाह विकास तथा जलागम प्रबंधन (Watershed Management) जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया।
3. काम के बदले अनाज कार्यक्रम (Food for Work Programme – FFWP), 1977: इस कार्यक्रम की शुरुआत ग्रामीण बेरोजगार एवं अल्परोजगार व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा में सुधार करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके अंतर्गत ग्रामीण श्रमिकों को सार्वजनिक निर्माण कार्यों के बदले खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता था। इन कार्यों में सड़क निर्माण, सिंचाई सुविधाओं का विकास तथा अन्य सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण शामिल था। वर्ष 1980 में इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (National Rural Employment Programme – NREP) के रूप में पुनर्गठित किया गया।
4. स्व-रोजगार के लिए ग्रामीण युवाओं का प्रशिक्षण (Training of Rural Youth for Self Employment – TRYSEM), 1979: इस कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त, 1979 को ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन परिवारों के युवाओं को तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए की गई थी। इसका उद्देश्य युवाओं में ऐसे कौशल विकसित करना था, जिनकी सहायता से वे स्वरोजगार आधारित आर्थिक गतिविधियाँ प्रारंभ कर सकें। इसे एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (Integrated Rural Development Programme – IRDP) की सहायक योजना के रूप में लागू किया गया।
कार्यक्रमों का सही कालक्रम:
क्रम | कार्यक्रम | प्रारंभ वर्ष |
2 | सामुदायिक विकास कार्यक्रम | 1952 |
4 | सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम | 1973–74 |
1 | काम के बदले अनाज कार्यक्रम | 1977 |
3 | ट्राइसेम (TRYSEM) | 1979 |
इन कार्यक्रमों के उद्देश्यों में महत्त्वपूर्ण अंतर था। सामुदायिक विकास कार्यक्रम व्यापक ग्रामीण विकास पर केंद्रित था, सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम प्राकृतिक संसाधनों और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के विकास से संबंधित था, काम के बदले अनाज कार्यक्रम ने मजदूरी आधारित रोजगार एवं खाद्य सुरक्षा पर बल दिया, जबकि TRYSEM का प्रमुख उद्देश्य प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के योग्य बनाना था।