JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ECONOMY · 2024

Previous Year Question

जुलाई-सितम्बर, 2019 और जुलाई-सितम्बर, 2022 के बीच भारत में बेरोजगारी दर की प्रवृत्ति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. यह स्थिर रही।

  2. यह घट गई।

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर चुनिए :

A.

2 सही है और 1 गलत है।

B.

1 और 2 दोनों गलत हैं।

C.

1 सही है और 2 गलत है।

D.

1 और 2 दोनों सही हैं।

Correct Answer: A

Detailed Solution

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey – PLFS) के अनुसार, भारत के शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की बेरोजगारी दर जुलाई–सितंबर 2019 के 8.3% से घटकर जुलाई–सितंबर 2022 में 7.2% हो गई थी। इस प्रकार दोनों अवधियों के बीच बेरोजगारी दर में 1.1 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई।

कथन 1 गलत है। जुलाई–सितंबर 2019 और जुलाई–सितंबर 2022 के बीच बेरोजगारी दर स्थिर नहीं रही। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के त्रैमासिक आँकड़ों में दोनों अवधियों के बीच बेरोजगारी दर में कमी दर्ज की गई थी।

कथन 2 सही है। जुलाई–सितंबर 2019 में बेरोजगारी दर 8.3% थी, जबकि जुलाई–सितंबर 2022 में यह घटकर 7.2% हो गई। इसी अवधि में श्रमिक जनसंख्या अनुपात (Worker Population Ratio – WPR) 43.4% से बढ़कर 44.5% हो गया था। ये आँकड़े शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु की जनसंख्या से संबंधित हैं।

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) की शुरुआत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office – NSO) द्वारा अप्रैल 2017 में की गई थी। इसका उद्देश्य रोजगार, बेरोजगारी तथा श्रम बल की भागीदारी से संबंधित नियमित आँकड़े उपलब्ध कराना है।

PLFS के प्रमुख संकेतक:

  1. बेरोजगारी दर (Unemployment Rate – UR): कुल श्रम बल में बेरोजगार व्यक्तियों का प्रतिशत।

  1. श्रम बल भागीदारी दर (Labour Force Participation Rate – LFPR): कुल जनसंख्या में कार्यरत अथवा काम की तलाश में या काम के लिए उपलब्ध व्यक्तियों का प्रतिशत।

  1. श्रमिक जनसंख्या अनुपात (Worker Population Ratio – WPR): कुल जनसंख्या में कार्यरत व्यक्तियों का प्रतिशत।

PLFS के त्रैमासिक बुलेटिन में शहरी क्षेत्रों के रोजगार एवं बेरोजगारी संकेतकों का आकलन चालू साप्ताहिक स्थिति (Current Weekly Status – CWS) के आधार पर किया जाता है। इसमें सर्वेक्षण से पहले के सात दिनों की गतिविधियों के आधार पर व्यक्ति की रोजगार स्थिति निर्धारित की जाती है।

बेरोजगारी दर में कमी और रोजगार अनुपात में वृद्धि अलग-अलग संकेतक हैं। बेरोजगारी दर श्रम बल में बेरोजगार व्यक्तियों का अनुपात दर्शाती है, जबकि WPR कुल जनसंख्या में कार्यरत व्यक्तियों का अनुपात बताता है। इसलिए श्रम बाजार की स्थिति का आकलन करते समय दोनों संकेतकों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

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