JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ECONOMY · 2021

Previous Year Question

शीर्षक मुद्रास्फीति टोकरी में सभी वस्तुओं के मूल्य में परिवर्तन को संदर्भित करती है। शीर्षक मुद्रास्फीति का मापन किस आधार पर किया जाता है?

A.

थोक मूल्य सूचकांक

B.

औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक

C.

सामूहिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक

D.

शहरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक

Correct Answer: C

Detailed Solution

शीर्षक मुद्रास्फीति (Headline Inflation) का मापन भारत में संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – Combined, CPI-C) के आधार पर किया जाता है। यह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की निर्धारित टोकरी (Basket) के समग्र मूल्य स्तर में परिवर्तन को दर्शाता है।

संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-Combined) में ग्रामीण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-Rural) और शहरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-Urban) दोनों शामिल होते हैं। इनके संयोजन में घरेलू उपभोग व्यय पर आधारित भारों (Weights) का उपयोग किया जाता है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मूल्य परिवर्तनों का संयुक्त आकलन प्राप्त होता है।

शीर्षक मुद्रास्फीति की गणना:

यहाँ CPIₜ वर्तमान महीने का सूचकांक तथा CPIₜ₋₁₂ पिछले वर्ष के उसी महीने का सूचकांक है। इस प्रकार सामान्यतः वर्ष-दर-वर्ष (Year-on-Year) मूल्य परिवर्तन की गणना की जाती है।

शीर्षक मुद्रास्फीति (Headline Inflation) में खाद्य पदार्थ, ईंधन तथा अन्य उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य परिवर्तन शामिल होते हैं। इसके विपरीत, मूल मुद्रास्फीति (Core Inflation) के विश्लेषण में सामान्यतः खाद्य एवं ईंधन से संबंधित अस्थिर कीमतों को अलग रखा जाता है, ताकि अपेक्षाकृत स्थायी मूल्य प्रवृत्तियों का अध्ययन किया जा सके।

दिए गए अन्य मूल्य सूचकांकों का अंतर:

  • थोक मूल्य सूचकांक (WPI): थोक स्तर पर वस्तुओं के मूल्य परिवर्तन को मापता है। इसमें सेवाओं को शामिल नहीं किया जाता।

  • औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW): औद्योगिक श्रमिक परिवारों के उपभोग व्यय से संबंधित मूल्य परिवर्तन को दर्शाता है।

  • शहरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-Urban): केवल शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए मूल्य परिवर्तन का आकलन करता है।

भारत में पहले WPI का उपयोग प्रमुख मुद्रास्फीति संकेतक के रूप में किया जाता था। 2014 में उर्जित पटेल समिति ने मौद्रिक नीति के लिए CPI-Combined आधारित मुद्रास्फीति को अपनाने की सिफारिश की थी। वर्ष 2016 में Flexible Inflation Targeting Framework को वैधानिक आधार मिलने के बाद CPI-Combined भारत की मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण व्यवस्था का आधार बन गया।

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