JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

ECONOMY · 2021

Previous Year Question

निम्नलिखित में से कौन-सा आर्थिक विकास का प्रमुख कारक नहीं है ?

A.

पूँजी का संचय एवं तकनीक सुधार

B.

जनसंख्या में परिवर्तन

C.

विशेषीकृत क्रियाओं/गतिविधियों में श्रम विभाजन

D.

तकनीकविद् एवं नौकरशाह

Correct Answer: D

Detailed Solution

आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) का अर्थ किसी अर्थव्यवस्था में निश्चित अवधि के दौरान वस्तुओं और सेवाओं के वास्तविक उत्पादन में वृद्धि से है। इसके प्रमुख निर्धारकों में पूँजी संचय (Capital Accumulation), तकनीकी प्रगति (Technological Progress), श्रमशक्ति, जनसांख्यिकीय परिवर्तन तथा श्रम विभाजन और विशेषज्ञता शामिल हैं।

विकल्प (a): पूँजी का संचय एवं तकनीक सुधार। पूँजी संचय में मशीनों, उपकरणों, कारखानों तथा आधारभूत संरचना जैसी उत्पादक परिसंपत्तियों में वृद्धि शामिल होती है। इससे अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता बढ़ती है। तकनीकी सुधार संसाधनों के अधिक दक्ष उपयोग को संभव बनाते हैं, जिससे श्रम उत्पादकता (Labour Productivity) तथा कुल कारक उत्पादकता (Total Factor Productivity – TFP) में वृद्धि हो सकती है।

विकल्प (b): जनसंख्या में परिवर्तन। जनसंख्या का आकार, आयु संरचना तथा श्रमबल में भागीदारी आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करते हैं। कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में वृद्धि से जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) की संभावना उत्पन्न होती है। हालाँकि इसका आर्थिक लाभ शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसरों तथा उत्पादक निवेश की उपलब्धता पर निर्भर करता है। केवल जनसंख्या में वृद्धि अपने आप आर्थिक विकास सुनिश्चित नहीं करती।

विकल्प (c): विशेषीकृत क्रियाओं में श्रम विभाजन। श्रम विभाजन (Division of Labour) का अर्थ उत्पादन प्रक्रिया को अलग-अलग विशिष्ट कार्यों में बाँटना है। इससे श्रमिकों की विशेषज्ञता, कार्यकुशलता तथा उत्पादकता बढ़ सकती है। अर्थशास्त्री एडम स्मिथ (Adam Smith) ने अपनी पुस्तक The Wealth of Nations (1776) में पिन निर्माण उद्योग (Pin Factory) के उदाहरण द्वारा श्रम विभाजन से उत्पादकता में होने वाली वृद्धि को स्पष्ट किया था।

विकल्प (d): तकनीकविद् एवं नौकरशाह। तकनीकविद् (Technocrats) विशेष तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता रखने वाले व्यक्ति होते हैं, जबकि नौकरशाह (Bureaucrats) प्रशासनिक एवं नीतिगत कार्यों के क्रियान्वयन से संबंधित होते हैं। ये आर्थिक गतिविधियों, संस्थागत दक्षता तथा नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन आर्थिक वृद्धि के मानक प्रमुख निर्धारकों की सूची में इन्हें अलग उत्पादन कारक के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाता।

आर्थिक वृद्धि के मानक विश्लेषण में भौतिक पूँजी, मानव पूँजी (Human Capital), श्रम, तकनीकी प्रगति तथा उत्पादकता को प्रमुख स्थान दिया जाता है। तकनीकविदों और नौकरशाहों का योगदान इन कारकों और संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से हो सकता है, लेकिन उनका पेशागत वर्गीकरण स्वयं आर्थिक वृद्धि का स्वतंत्र प्रमुख निर्धारक नहीं है।

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